Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड महिला पर्यवेक्षिका प्रतियोगिता परीक्षा 2023 में सफल 33 अभ्यर्थियों की स्नातक डिग्री की वैधता पर सवाल उठे हैं। विभागीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को वापस लौटा दी है। विभाग ने आयोग से मामले में आगे की कार्रवाई करने का आग्रह किया है। जानकारी के अनुसार, सभी 33 अभ्यर्थियों ने राज्य के एक निजी विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की थी। जांच कमेटी ने उनकी डिग्रियों और शैक्षणिक रिकॉर्ड में कई विसंगतियां पाई हैं। वहीं, उच्च शिक्षा विभाग ने संबंधित विश्वविद्यालय के खिलाफ कार्रवाई के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को भी पत्र लिखा है।
जांच में सामने आईं डिग्री और रिकॉर्ड से जुड़ी विसंगतियां
विभागीय जांच के दौरान अभ्यर्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आने की बात कही गई है। इनमें प्रमुख रूप से निम्न बिंदु शामिल हैं:

- रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में परेशानी: विश्वविद्यालय को 33 अभ्यर्थियों की फीस रसीद, दैनिक उपस्थिति और आंतरिक मूल्यांकन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने में कठिनाई हुई।
- उपस्थिति शीट में ओवरराइटिंग: जांच में उपस्थिति रिकॉर्ड पर उत्तर पुस्तिकाओं के सीरियल नंबर में काट-छांट या ओवरराइटिंग मिलने की बात सामने आई।
- डिग्री जारी करने की तारीख पर सवाल: अधिकांश डिग्रियों पर 15 मई 2025 की तारीख दर्ज है, जबकि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह 9 मार्च 2025 को हुआ था।
- शैक्षणिक अवधि में अंतर: कुछ प्रोविजनल प्रमाण-पत्रों और अंतिम डिग्री से जुड़े रिकॉर्ड में भी विसंगतियां बताई गई हैं। इसके अलावा, कई अभ्यर्थियों के 12वीं पास करने और स्नातक में नामांकन लेने के बीच छह से 13 वर्ष का अंतर पाया गया।
- इन विसंगतियों के आधार पर विभागीय कमेटी ने डिग्रियों को संदेहास्पद माना है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों की आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
2023 में शुरू हुई थी भर्ती प्रक्रिया
झारखंड महिला पर्यवेक्षिका प्रतियोगिता परीक्षा 2023 के लिए JSSC ने वर्ष 2023 में आवेदन आमंत्रित किए थे। परीक्षा सितंबर 2024 में आयोजित हुई और इसका परिणाम 27 मई 2025 को जारी किया गया। इसके बाद आयोग ने सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को अनुशंसा भेजी थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, विभाग ने 444 उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए अधियाचना भेजी थी। परीक्षा में 313 अभ्यर्थी सफल हुए थे, जबकि 131 पद रिक्त रह गए थे। अब 33 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा वापस लौटाए जाने से उनकी नियुक्ति पर सवाल खड़े हो गए हैं।
28 अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मामला कोर्ट में
इस भर्ती से जुड़े 28 अन्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मामला न्यायालय में लंबित बताया गया है। ऐसे में अब JSSC की आगे की कार्रवाई और संबंधित विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रस्तावित कदमों पर नजर रहेगी।





















