Samachar Post रिपोर्टर, रांची : गढ़वा के नगर उंटारी में धरना-प्रदर्शन के दौरान झामुमो विधायक अनंत प्रताप देव की ओर से बीडीओ और सीओ को कथित तौर पर धमकी दिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सामने आए वीडियो में विधायक द्वारा अधिकारियों को कार्यालय में घुसकर पीटने की बात कहे जाने का दावा किया गया है। इस मामले को लेकर कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद ने झामुमो नेताओं, कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। अंबा प्रसाद ने कहा कि सामने आए वीडियो को देखने के बाद जनता खुद तय करे कि सत्तारूढ़ दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं का व्यवहार ‘सुशासित’ और ‘अनुशासित’ जैसे शब्दों के अनुरूप है या नहीं। उन्होंने सरकार पर भी निशाना साधते हुए जल, जंगल और जमीन से जुड़े दावों के बीच आम लोगों की समस्याओं को लेकर सवाल उठाए।
JMM विधायक के कथित बयान पर उठाए सवाल
नगर उंटारी में आयोजित धरना कार्यक्रम के दौरान अनंत प्रताप देव ने कथित तौर पर बीडीओ और सीओ को झामुमो कार्यकर्ताओं को परेशान नहीं करने की चेतावनी दी थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनके बयान में अधिकारियों के खिलाफ कार्यालय में घुसकर मारने की बात कही गई थी। यह धरना MMDR संशोधन के विरोध में आयोजित कार्यक्रम का हिस्सा था। अंबा प्रसाद ने इसी बयान को लेकर झामुमो के नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के अनुशासन पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस का कोई मंत्री या नेता इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करता, तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग उठती। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही नियम झामुमो के नेताओं और विधायकों पर भी लागू होते हैं।
‘मौन रहना सहमति का लक्षण’ कहकर प्रशासन पर निशाना
कांग्रेस विधायक ने ‘मौने सम्मति लक्षणम्’ कहावत का जिक्र करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों की कथित चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि अधिकारियों ने संबंधित वीडियो नहीं देखा होगा। अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि अधिकारी राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अधिकारियों को अपनी ‘रीढ़ की हड्डी’ की जांच करानी चाहिए और ‘गले का पट्टा’ थोड़ा ढीला करना चाहिए।
‘जनता के सेवक से विशेष कुर्सी के सेवक बन गए अधिकारी’
अंबा प्रसाद ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी जनता के सेवक होने के बजाय ‘विशेष कुर्सी के सेवक’ बन गए हैं। उन्होंने अपने बयान में मानव शरीर की कॉक्सिक्स (Coccyx) हड्डी का भी जिक्र करते हुए अधिकारियों की कार्यशैली पर व्यंग्य किया। कांग्रेस विधायक ने कहा कि उनका सवाल केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच जवाबदेही तथा व्यवहार से जुड़ा मुद्दा है। वहीं, अनंत प्रताप देव के कथित बयान पर भाजपा नेता लक्ष्मण राम ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों के साथ अपनी बात संवैधानिक तरीके से रखनी चाहिए।




















