Samachar Post रिपोर्टर, रांची : रांची विश्वविद्यालय का 39वां दीक्षांत समारोह बुधवार को विश्वविद्यालय परिसर स्थित दीक्षांत मंडप में आयोजित हुआ। समारोह की शुरुआत राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और रांची विश्वविद्यालय के कुलगीत से हुई। कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस मौके पर रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ, कुलपति प्रो. सरोज शर्मा सहित कई अतिथि मौजूद रहे। समारोह के दौरान कुल 3,353 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। विभिन्न संकायों और पाठ्यक्रमों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 71 गोल्ड मेडल दिए गए, जो 58 विद्यार्थियों के बीच वितरित हुए। इनमें 44 छात्राएं और 14 छात्र शामिल हैं। कुछ विद्यार्थियों ने एक से अधिक गोल्ड मेडल भी हासिल किए। रांची विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार दो प्रतिष्ठित शिक्षाविदों को मानद उपाधि प्रदान की गई। इनमें प्रो. डॉ. शशिकला बंजारी, कुलपति, NIEPA और प्रो. डॉ. आलोक राय, पूर्व कुलपति, लखनऊ विश्वविद्यालय तथा निदेशक, IIM कलकत्ता शामिल हैं। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने सभी उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनकी सफलता का श्रेय अभिभावकों और शिक्षकों की मेहनत को भी दिया।
‘दीक्षा शिक्षा का अंत नहीं, नई शुरुआत है’
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि दीक्षांत शिक्षा के समाप्त होने का नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारने की शुरुआत का प्रतीक है। विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों ने ज्ञान हासिल करने के साथ तर्क करना और सवालों के जवाब तलाशना सीखा है। अब उनके सामने जीवन की नई पाठशाला है, जहां परिस्थितियां सवाल बनकर सामने आएंगी और उनके निर्णय उन सवालों के जवाब होंगे। उन्होंने कहा कि डिग्री यह बताती है कि विद्यार्थी ने क्या सीखा है, लेकिन जीवन यह तय करेगा कि उसने उस ज्ञान का इस्तेमाल किस तरह किया। राज्यपाल ने विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ विवेक और सफलता के साथ संवेदनशीलता को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी। राज्यपाल ने कहा कि जीवन हमेशा हमारी योजनाओं के मुताबिक नहीं चलता। कुछ फैसले सफलता तक पहुंचाते हैं, जबकि कुछ गलतियां आगे बढ़ने की सीख देती हैं। ऐसे में सफलता मिलने पर विनम्र रहना और असफलता के समय धैर्य बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि असफलता को यात्रा का अंत नहीं समझना चाहिए। कई बार यही असफलता व्यक्ति को बेहतर दिशा चुनने का अवसर देती है।
विश्वविद्यालय केवल डिग्री नहीं, विचार भी देता है
रांची विश्वविद्यालय को झारखंड की शैक्षणिक यात्रा का अहम संस्थान बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने शिक्षा के साथ राज्य के सामाजिक और बौद्धिक विकास में भी योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की सफलता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि वहां से कितने विद्यार्थियों को डिग्री मिली। यह भी देखना जरूरी है कि वहां से कितने नए विचार, शोध और सकारात्मक सोच समाज तक पहुंची। राज्यपाल ने कुलाधिपति के तौर पर शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध, पारदर्शिता और विद्यार्थियों के हित को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में बताया। उन्होंने विश्वविद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करने पर जोर दिया, जहां विद्यार्थी पढ़ाई के साथ अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता को भी विकसित कर सकें। गंगवार ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक मजबूती नहीं है। देश को ज्ञान, विज्ञान, तकनीक, नवाचार, शिक्षा, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के क्षेत्र में भी मजबूत बनाना होगा। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं में होने वाला शोध, कक्षाओं में विकसित होने वाले विचार और युवाओं की कल्पनाशक्ति भविष्य के भारत की नींव तैयार करेगी। विद्यार्थियों से उन्होंने केवल नौकरी या अवसर तलाशने के बजाय नए अवसर पैदा करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

आधुनिकता के साथ संस्कृति का संतुलन जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा और तकनीक को अपनाने के साथ अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को भी आगे बढ़ाना चाहिए। उनके अनुसार आधुनिकता विकास की गति देती है, जबकि संस्कृति सही दिशा दिखाती है। दोनों के बीच संतुलन से विकास अधिक सार्थक और टिकाऊ बन सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में एक सवाल हमेशा याद रखने को कहा- “मैंने क्या पाया” के साथ “मैंने क्या दिया?” उनके मुताबिक व्यक्ति की वास्तविक उपलब्धि केवल उसकी निजी सफलता से नहीं, बल्कि समाज के प्रति उसके योगदान से तय होती है। इससे पहले कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम, एक वर्षीय और दो वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम तथा मल्टीपल एंट्री-मल्टीपल एग्जिट व्यवस्था लागू करने की दिशा में काम किया गया है। उन्होंने नए पाठ्यक्रमों के साथ डिजिटल दस्तावेजों, शोध और करियर मार्गदर्शन से जुड़े केंद्रों को बढ़ावा देने की जानकारी भी दी।
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संजय सेठ ने ऑडिटोरियम के आधुनिकीकरण का सुझाव दिया
रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ ने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की। उन्होंने रांची विश्वविद्यालय में करीब 68 करोड़ रुपये की लागत से तैयार पुस्तकालय विश्वविद्यालय को सौंपने और दीक्षांत मंडप के आधुनिकीकरण की मांग राज्यपाल के समक्ष रखी।संजय सेठ ने दीक्षांत मंडप को आधुनिक ऑडिटोरियम के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया, ताकि भविष्य में विश्वविद्यालय में बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा सकें। समारोह के दौरान रांची विश्वविद्यालय के इतिहास और पिछले एक वर्ष की गतिविधियों पर आधारित स्मारिका का विमोचन भी किया गया। दीक्षांत समारोह ने 3,353 विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव को पूरा करने के साथ उनके जीवन के नए चरण की शुरुआत को भी चिह्नित किया।

Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।


