विश्वविद्यालय-कॉलेजों में शिकायतें नहीं रहेंगी लंबित, निपटारे की समय-सीमा तय; उल्लंघन पर जुर्माना

Rupa Kumari | September 2, 2026 | 03:20 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की शिकायतों के निपटारे को लेकर अब जवाबदेही तय होगी। झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 में शिकायतों के समाधान के लिए अलग-अलग समितियों और न्यायाधिकरण की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य शिकायतों को अनिश्चित समय तक लंबित रखने के बजाय तय अवधि के भीतर सुनवाई और निर्णय सुनिश्चित करना है।

छात्रों की शिकायतों पर 15 कार्य दिवस में फैसला

छात्रों की शैक्षणिक, प्रवेश, प्रशासनिक और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर छात्र शिकायत निवारण समिति (SGRC) का गठन किया जाएगा। शिकायत प्राप्त होने के बाद समिति को 15 कार्य दिवसों के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिश देनी होगी। छात्रसंघ चुनाव और चुनाव आचार संहिता से जुड़े विवादों को भी इस व्यवस्था के दायरे में रखा गया है। इसके अलावा UGC के नियमों के अनुसार लोकपाल की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है।

कर्मचारियों की शिकायतों का तीन महीने में निपटारा

शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों से जुड़े सेवा विवादों के लिए कर्मचारी शिकायत निवारण समिति (EGRC) काम करेगी। वेतन, सेवा शर्तों, पदोन्नति और अन्य सेवा संबंधी मामलों को समिति के समक्ष रखा जा सकेगा। EGRC को शिकायत दर्ज होने के तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर निर्णय देना होगा। समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश या कम से कम 10 वर्ष के अनुभव वाले मान्यता प्राप्त अधिवक्ता करेंगे।

निलंबन या बर्खास्तगी पर 30 दिन में अपील

किसी कर्मचारी को बर्खास्तगी, निलंबन या पदावनति का सामना करना पड़ा हो या वह EGRC के फैसले से संतुष्ट नहीं हो, तो उसे 30 दिनों के भीतर कर्मचारी शिकायत निवारण न्यायाधिकरण (EGRT) में अपील करने का अधिकार होगा। न्यायाधिकरण की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या अधिनियम में निर्धारित योग्यता रखने वाला व्यक्ति करेगा। न्यायाधिकरण का फैसला संबंधित पक्षों के लिए अंतिम और बाध्यकारी होगा।

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आदेश का पालन नहीं करने पर आर्थिक दंड

अधिनियम में विश्वविद्यालय और कॉलेजों पर न्यायाधिकरण के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए आर्थिक दंड का भी प्रावधान किया गया है। पहली बार उल्लंघन पर: 10 हजार से 1 लाख रुपये तक जुर्माना। दूसरी या बाद की बार उल्लंघन पर: 50 हजार से 5 लाख रुपये तक जुर्माना। इसके बाद भी आदेश का पालन नहीं करने पर: आदेश लागू होने तक हर दिन 2 हजार रुपये अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद विश्वविद्यालय और कॉलेजों में शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक समयबद्ध और जवाबदेह बनाने की कोशिश की गई है।

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