रांची में पूर्व MLC सुबोध राय के शराब बॉटलिंग प्लांट का लाइसेंस रद्द, अवैध उत्पादन के आरोप

Rupa Kumari | August 22, 2026 | 10:52 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : रांची जिले के ओरमांझी स्थित उकरीद गांव में संचालित मेसर्स तरंगनी लीकर्स प्राइवेट लिमिटेड बॉटलिंग प्लांट का लाइसेंस प्रशासन ने रद्द कर दिया है। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने उत्पाद अधिनियम के तहत यह कार्रवाई करते हुए प्लांट प्रबंधन द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को अस्वीकार कर दिया। यह प्लांट बिहार के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) सुबोध कुमार राय से जुड़ा बताया जाता है। जांच में आरोप सामने आए हैं कि लाइसेंसी परिसर में अवैध रूप से व्हिस्की का उत्पादन किया जा रहा था और उत्पाद शुल्क की चोरी के उद्देश्य से गैर-पंजीकृत स्टॉक छिपाकर रखा गया था।

पहले ही जेल जा चुके हैं तीन आरोपी

इस मामले में पूर्व एमएलसी सुबोध कुमार राय, देवेंद्र भगत और रविकांत राय को पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। हालांकि सुबोध कुमार राय को बाद में जमानत मिल गई और वह फिलहाल जेल से बाहर हैं। मामले में 1 जुलाई को उत्पाद विभाग की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि प्लांट में अवैध रूप से ‘सेल फॉर यूपी’ और ‘सेल फॉर दिल्ली’ लेबल वाली शराब तैयार की जा रही थी। छापेमारी के दौरान ऐसी शराब भी बरामद होने का दावा किया गया था।

सील प्लांट से गायब मिले शराब के कार्टन

मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब प्रशासनिक सील लगे प्लांट से शराब की पेटियां और महत्वपूर्ण साक्ष्य गायब पाए गए। 1 जुलाई को उत्पाद विभाग और ओरमांझी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बाद प्लांट को सील कर दिया गया था। नियमों के तहत सीलिंग के बाद भौतिक सत्यापन और डिजिटल स्टॉक का मिलान किया जाना था, लेकिन यह प्रक्रिया लगभग डेढ़ महीने तक लंबित रही। 17 अगस्त को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में जब प्लांट की सील खोली गई, तो पीछे के दरवाजे का ताला टूटा हुआ मिला। जांच के दौरान प्लांट के अंदर रखी शराब की कई पेटियां, अहम दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य गायब पाए गए।

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जांच और अभियोजन के सामने नई चुनौती

सूत्रों के अनुसार, साक्ष्यों के गायब होने के पीछे सुनियोजित साजिश की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियों के लिए यह साबित करने में सबसे अहम भूमिका केमिकल फॉर्मूलेशन, संबंधित बैच रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक की थी, जिनके आधार पर कथित अवैध शराब उत्पादन की पुष्टि की जा सकती थी। साक्ष्य गायब होने के बाद अभियोजन पक्ष के सामने यह साबित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है कि यूपी और दिल्ली के लेबल वाली शराब का उत्पादन इसी प्लांट में किया जा रहा था। फिलहाल प्रशासन और जांच एजेंसियां मामले की आगे की जांच में जुटी हैं। लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

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