Samachar Post रिपोर्टर,गुमला : गुमला समाहरणालय परिसर में सोमवार को आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंची सेविका-सहायिकाओं ने सरकार के प्रति नाराजगी जताते हुए लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने की अपील की। धरने के दौरान समान काम के बदले समान वेतन की मांग प्रमुखता से उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों के बावजूद उन्हें अपेक्षित मानदेय और सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल रहा है।
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जिम्मेदारियों के मुकाबले मानदेय कम होने का आरोप
संघ की प्रदेश अध्यक्ष रीमा देवी ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाएं लंबे समय से सरकार और समाज के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं को पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद सेविका-सहायिकाओं को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल रही है।

कई सरकारी योजनाओं में निभाती हैं जिम्मेदारी
सेविका-सहायिकाओं ने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं और अभियानों में उनकी ड्यूटी लगाई जाती है। केंद्र सरकार की योजनाओं के अलावा राज्य सरकार की मंईयां सम्मान योजना जैसे कार्यों में भी उनसे सहयोग लिया गया है। उनका आरोप है कि लगातार अतिरिक्त जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, लेकिन इसके बदले अलग से कोई विशेष मानदेय या लाभ नहीं मिलता। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, करीब 10 हजार रुपये के मानदेय में उन्हें कई तरह के कार्य करने पड़ते हैं। आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं ने बताया कि बच्चों की देखभाल, पोषण संबंधी गतिविधियां, रिकॉर्ड तैयार करना, सर्वेक्षण, सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाना और विभिन्न अभियानों में भागीदारी जैसे कार्य उनकी जिम्मेदारियों में शामिल हैं।
नियमित वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की मांग
संघ की जिलाध्यक्ष ममता देवी ने कहा कि सेविका-सहायिकाएं अपने दायित्वों से पीछे नहीं हटतीं, लेकिन सरकार को भी उनके भविष्य और सम्मान को लेकर गंभीर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्षों तक सेवा देने के बावजूद कर्मचारियों के सामने भविष्य की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। नियमित वेतन, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
आंगनबाड़ी व्यवस्था मजबूत करने की भी मांग
संघ की पदाधिकारी फूलमती देवी ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए बच्चों और महिलाओं के कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं। इन सेवाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने में सेविका और सहायिकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उनकी समस्याओं का समाधान केवल कर्मचारियों के हित में ही नहीं, बल्कि आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी जरूरी है। धरने में शामिल सेविका-सहायिकाओं ने सरकार से मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोतरी करने, समान काम के बदले समान वेतन का प्रावधान लागू करने और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन एवं अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं देने की मांग की। संघ नेताओं ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को सरकार के सामने रख रही हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं हुआ है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संघ की प्रदेश अध्यक्ष रीमा देवी, जिलाध्यक्ष ममता देवी और पदाधिकारी फूलमती देवी ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सेविका-सहायिकाएं अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष जारी रखेंगी।

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