Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान संताल परगना में लंबित सर्वे-सेटलमेंट का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। विपक्ष के हंगामे के बीच शुरू हुई कार्यवाही में विधायक हेमलाल मुर्मू ने अपनी ही सरकार से सवाल करते हुए कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में 10 वर्षों में सर्वे-सेटलमेंट का कार्य पूरा हो गया था, लेकिन संताल परगना में पिछले 50 वर्षों से यह प्रक्रिया अधूरी है। हेमलाल मुर्मू ने सदन में पूछा कि आखिर सर्वे-सेटलमेंट का कार्य और कितने वर्षों तक लंबित रहेगा। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक प्रक्रिया पूरी नहीं होना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है और इससे क्षेत्र के लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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मंत्री दीपक बिरुआ ने दिया जवाब
इस पर राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरुआ ने जवाब देते हुए कहा कि संताल परगना में सर्वे-सेटलमेंट की प्रक्रिया वर्ष 1974-75 से चल रही है, लेकिन पुरानी कार्यप्रणाली के कारण इसे समय पर पूरा नहीं किया जा सका। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस संबंध में एक समिति का गठन किया है, जो तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसके बाद आधुनिक तकनीक की मदद से सर्वे का कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।

सदन में उठा CNT जमीन की खरीद-बिक्री का मुद्दा
प्रश्नकाल के दौरान विधायक उमाकांत रजक ने चंदनक्यारी में CNT जमीन की कथित खरीद-बिक्री का मामला भी सदन में उठाया। इस पर मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि मामले की जांच कर एक सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में भूमि सर्वे, CNT भूमि से जुड़े मामले और प्रशासनिक कार्यों में देरी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। सरकार ने लंबित मामलों के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया।

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