Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में अध्यक्ष का पद लंबे समय से खाली रहने पर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि JPSC एक संवैधानिक संस्था है और इसके अध्यक्ष का पद लंबे समय तक रिक्त नहीं रखा जा सकता। अदालत ने राज्य के महाधिवक्ता को निर्देश दिया है कि वे सरकार से परामर्श कर बताएं कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति कब तक की जाएगी।
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स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
यह टिप्पणी राज्य के वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के बड़ी संख्या में रिक्त पदों को लेकर स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की गई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित की है। अब सरकार को इस दौरान नियुक्ति की समयसीमा पर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।
ACF और रेंजर भर्ती प्रक्रिया पर पड़ा असर
सुनवाई के दौरान JPSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने अदालत को बताया कि सहायक वन संरक्षक (ACF) और वन क्षेत्र पदाधिकारी (रेंजर) भर्ती परीक्षा आयोजित की जा चुकी है और उसका परिणाम भी जारी हो चुका है। शारीरिक दक्षता परीक्षा की तारीख भी घोषित की जा चुकी है, लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के इस्तीफे के बाद अध्यक्ष का पद खाली होने से आगे की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

CID जांच का भी जताया गया संकेत
अदालत को यह भी बताया गया कि ACF और रेंजर भर्ती परीक्षा CID जांच के दायरे में आ सकती है। ऐसे में आयोग के अध्यक्ष का पद खाली रहने से भर्ती प्रक्रिया के अगले चरणों को आगे बढ़ाने में व्यावहारिक और प्रशासनिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं।
सरकार के अगले कदम पर टिकी निगाहें
JPSC में अध्यक्ष नहीं होने के कारण साक्षात्कार, शारीरिक दक्षता परीक्षा और अन्य नियुक्ति संबंधी प्रक्रियाओं पर असर पड़ रहा है। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब सभी की नजर राज्य सरकार पर है। उम्मीद की जा रही है कि 20 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई तक सरकार नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर अपनी समयसीमा अदालत के समक्ष रखेगी।

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