Samachar Post रिपोर्टर, रांची : वित्त विभाग के चर्चित प्रशाखा पदाधिकारी (एसओ) संतोष कुमार उर्फ मस्ताना का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। अदालत से जमानत मिलने के करीब छह महीने बाद भी उनका विभागीय योगदान स्वीकार नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि मस्ताना 24 फरवरी 2026 से वित्त विभाग में योगदान देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति नहीं मिली है।
कई बार दिया आवेदन, फिर भी नहीं मिली अनुमति
सूत्रों के अनुसार, संतोष कुमार मस्ताना ने वित्त सचिव और कार्मिक सचिव को कई बार आवेदन देकर अपना योगदान स्वीकार करने का आग्रह किया है। इसके बावजूद विभाग की ओर से अब तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है। इस स्थिति को लेकर प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा तेज है। गौरतलब है कि 20 फरवरी 2026 को अदालत ने संतोष कुमार मस्ताना को जमानत प्रदान की थी। इसके बाद उन्होंने विभाग में पुनः योगदान देने की प्रक्रिया शुरू की। हालांकि, अब तक उनकी वापसी पर फैसला नहीं हो सका है।
सीजीएल परीक्षा विवाद में आया था नाम
संतोष कुमार मस्ताना का नाम झारखंड की चर्चित सीजीएल परीक्षा विवाद में सामने आया था। उन पर परीक्षा प्रश्नपत्र लीक से जुड़ी अफवाह फैलाने का आरोप लगा था। इस मामले में सीआईडी ने उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी और 28 अक्टूबर 2024 को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर विभिन्न पक्षों को सुना। वहीं, झारखंड हाईकोर्ट की तत्कालीन पीठ ने दिसंबर 2025 में दिए गए अपने आदेश में सीआईडी को छह माह के भीतर अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।
जांच पूरी नहीं, लेकिन अन्य मामलों में कार्रवाई तेज
जानकारी के अनुसार, निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद सीआईडी अब तक इस मामले में अंतिम जांच पूरी नहीं कर सकी है। दूसरी ओर, हाल के दिनों में 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सीआईडी की कार्रवाई तेज हुई है। इस मामले में कई स्थानों पर छापेमारी की गई है और कुछ अधिकारियों व अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है।
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प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
मस्ताना के समर्थक और कुछ कर्मचारी संगठन यह सवाल उठा रहे हैं कि जब अदालत से जमानत मिलने के बाद कई मामलों में अधिकारियों का निलंबन समाप्त कर उन्हें पुनः पदस्थापित किया जाता है, तो संतोष कुमार मस्ताना के मामले में अब तक निर्णय क्यों नहीं लिया गया। हालांकि, इस विषय पर सरकार या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जांच और विभागीय निर्णय पर टिकी निगाहें
फिलहाल, संतोष कुमार मस्ताना की विभाग में वापसी और सीआईडी की अंतिम जांच रिपोर्ट दोनों ही चर्चा का विषय बने हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार और जांच एजेंसी की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

