JPSC सदस्य जमाल अहमद को पद से हटाने की मांग, बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

Rupa Kumari | July 24, 2026 | 03:03 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े विवादों के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर आयोग के सदस्य जमाल अहमद को तत्काल पद से हटाने और उनकी संपत्तियों की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से जांच कराने की मांग की है।मरांडी ने पत्र में जमाल अहमद पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने, पद के दुरुपयोग और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने जैसे आरोप लगाए हैं।

आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में बाबूलाल मरांडी ने दावा किया है कि जमाल अहमद ने पिछले कुछ वर्षों में बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्तियां अर्जित की हैं। पत्र के अनुसार, रांची में उनके पास 3000 से 4000 वर्गफुट का एक आलीशान फ्लैट होने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा एक अन्य बड़े फ्लैट की तलाश करने और हजारीबाग में भी उनके नाम अथवा कथित बेनामी संपत्तियां होने की बात कही गई है।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित एजेंसियों द्वारा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

मरांडी ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि जमाल अहमद पहले प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे और वर्ष 2008 में उनकी नियुक्ति लेक्चरर के पद पर हुई थी। पत्र में दावा किया गया है कि उस नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े कथित मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा की जा रही है। इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया है कि जांच के दायरे में रही नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े व्यक्ति को JPSC जैसी संवैधानिक संस्था का सदस्य कैसे बनाया गया।

राजनीतिक दबाव में नियुक्ति का आरोप

शिकायत पत्र में यह आरोप भी लगाया गया है कि तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम के प्रभाव या दबाव में जमाल अहमद की नियुक्ति की गई थी। मरांडी ने कहा कि यदि ऐसे आरोपों से घिरे व्यक्ति संवैधानिक पदों पर बने रहते हैं तो इससे आयोग की निष्पक्षता और प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल युवाओं का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

ACB जांच और पद से हटाने की मांग

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जमाल अहमद की सभी चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और आय के स्रोतों की ACB से विस्तृत जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उन्हें JPSC सदस्य के पद से तत्काल हटाया जाना चाहिए।

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सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल मुख्यमंत्री कार्यालय या JPSC की ओर से इस पत्र और लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यदि सरकार इस मांग पर कोई निर्णय लेती है तो उसका असर JPSC से जुड़े चल रहे विवादों और जांचों पर भी पड़ सकता है।

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