अफीम तस्कर कोंटा मुंडा को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, सजा निलंबन की चौथी अर्जी भी खारिज

Meenu | July 23, 2026 | 10:47 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने अफीम तस्करी के मामले में 15 साल की सजा काट रहे खूंटी निवासी कोंटा मुंडा को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने सजा निलंबित करने की उसकी चौथी अंतरिम अर्जी खारिज करते हुए कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी समाज और देश के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे मामलों में दोषसिद्धि के बाद सजा निलंबित करने के लिए बेहद ठोस और मजबूत आधार होना जरूरी है।

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NDPS मामलों में राहत के लिए मजबूत आधार जरूरी

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और संजय प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि NDPS Act के तहत दोषसिद्धि के बाद केवल साक्ष्यों में कथित विरोधाभास या स्वतंत्र गवाह नहीं होने के आधार पर सजा निलंबित नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार दोषसिद्धि के बाद निर्दोष होने की धारणा लागू नहीं होती। अपीलीय अदालत इस स्तर पर पूरे साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन नहीं करती, बल्कि केवल यह देखती है कि सजा निलंबन के लिए प्रथम दृष्टया कोई मजबूत आधार मौजूद है या नहीं।

2018 में 6 किलो से अधिक अफीम बरामद होने का मामला

यह मामला वर्ष 2018 का है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति बिक्री के उद्देश्य से भारी मात्रा में अफीम लेकर जा रहा है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने कोंटा मुंडा को गिरफ्तार कर उसके झोले से करीब 6.005 किलोग्राम अफीम बरामद करने का दावा किया था। इसके बाद खूंटी की विशेष NDPS अदालत ने 30 जून 2022 को कोंटा मुंडा को 15 वर्ष के कठोर कारावास और 1.50 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

धारा 50 के उल्लंघन की दलील भी नहीं मानी

अपीलकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि NDPS अधिनियम की धारा 50 का पालन नहीं किया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि मामले के सभी गवाह पुलिसकर्मी हैं, कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है और बरामदगी को लेकर गवाहों के बयानों में विरोधाभास है। हालांकि हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि तलाशी से पहले धारा 50 के तहत आवश्यक नोटिस दिया गया था। बरामद नमूनों को विधिवत सुरक्षित कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था। खंडपीठ ने यह भी माना कि घटना तड़के सुबह हुई थी, इसलिए स्वतंत्र गवाह उपलब्ध नहीं होने संबंधी पुलिस की दलील प्रथम दृष्टया असंगत नहीं लगती।

मुख्य आपराधिक अपील पर सुनवाई जारी रहेगी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि NDPS अधिनियम समाज को नशीले पदार्थों के खतरे से बचाने के उद्देश्य से बनाया गया एक कठोर कानून है। इसलिए इसके प्रावधानों की व्याख्या उदारता से नहीं, बल्कि कानून के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए। इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने कोंटा मुंडा की सजा निलंबन की चौथी अंतरिम अर्जी खारिज कर दी। हालांकि, मामले की मुख्य आपराधिक अपील पर सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।

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