Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की संयुक्त सचिव मनीषा जोसेफ तिग्गा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने 15 जुलाई को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। जारी अधिसूचना के अनुसार मामला राज्य के विभिन्न थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने से संबंधित रिपोर्ट से जुड़ा है। आरोप है कि मनीषा जोसेफ तिग्गा ने सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति के बिना वास्तविक तथ्यों से भिन्न एक रिपोर्ट तैयार की और उसे सर्वोच्च न्यायालय में राज्य सरकार का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता को भेज दिया। सरकार का कहना है कि रिपोर्ट में तथ्यों की त्रुटियों के कारण पूर्व में भेजे गए प्रतिवेदन को निरस्त करना पड़ा और मामले में नए सिरे से रिपोर्ट तैयार कर भेजने की आवश्यकता उत्पन्न हुई।
गंभीर लापरवाही का आरोप
सरकारी अधिसूचना में इसे प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता का मामला बताया गया है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए उनके निलंबन की अनुशंसा की थी। इसके बाद झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2016 के नियम-9(1)(क) के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
निलंबन अवधि में रांची रहेगा मुख्यालय
आदेश के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान मनीषा जोसेफ तिग्गा का मुख्यालय दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय, रांची निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। सरकारी नियमों के तहत निलंबन अवधि के दौरान उन्हें झारखंड सरकारी सेवक नियमावली के प्रावधानों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) देय होगा।

राज्यपाल के आदेश से जारी हुई अधिसूचना
यह आदेश झारखंड के राज्यपाल के आदेश से जारी किया गया है। अधिसूचना पर सरकार के संयुक्त सचिव चिन्तू दोराईबुरु के हस्ताक्षर हैं। आदेश की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव, राजभवन, महालेखाकार तथा अन्य संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है।
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प्रशासनिक हलकों में चर्चा
इस कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही और संवेदनशील मामलों में तथ्यात्मक शुद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार के इस निर्णय की प्रशासनिक हलकों में व्यापक चर्चा हो रही है, क्योंकि मामला सीधे सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों से जुड़ा बताया जा रहा है।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।


