Samachar Post रिपोर्टर,रांची : झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा एजेंसियों को एक और बड़ी सफलता मिली है। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, 20 लाख रुपये के इनामी माओवादी कमांडर रविंद्र गंझू की 14 जुलाई को हुई गिरफ्तारी के बाद लातेहार-लोहरदगा सीमावर्ती क्षेत्र को नक्सल मुक्त माना जा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अब राज्य में केवल तीन सीमावर्ती और वन क्षेत्रों में ही प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के सक्रिय दस्ते बचे हैं।
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कोल्हान और सारंडा में सबसे मजबूत माओवादी दस्ता
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी सिंहभूम जिले के पोड़ाहाट, कोल्हान और सारंडा के घने जंगल अभी भी माओवादियों का सबसे बड़ा गढ़ बने हुए हैं। यहां एक करोड़ रुपये के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा के नेतृत्व में करीब 28 सदस्यों का दस्ता सक्रिय बताया गया है। इसे राज्य में किसी एक कमांडर के अधीन सबसे बड़ा माओवादी दस्ता माना जा रहा है।
इन सीमावर्ती इलाकों में भी सक्रिय हैं छोटे दस्ते
खुफिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य के अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में भी छोटे-छोटे माओवादी दस्ते सक्रिय हैं। पलामू-चतरा बॉर्डर पर दो अलग-अलग दस्तों की मौजूदगी बताई गई है। इनमें रीजनल कमेटी सदस्य नितेश यादव के दस्ते में लगभग तीन सदस्य हैं, जबकि जोनल कमेटी सदस्य मनोहर गंझू के साथ फिलहाल एक सदस्य सक्रिय बताया गया है। वहीं लातेहार-गढ़वा बॉर्डर पर जोनल कमेटी सदस्य राजू के नेतृत्व में लगभग तीन सदस्यों का दस्ता सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य में सक्रिय प्रतिबंधित संगठनों की अनुमानित संख्या इस प्रकार है भाकपा (माओवादी) 35 सदस्य, जेजेएमपी (JJMP) 4 सदस्य, टीपीसी (TPC) 3 सदस्य रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिमी सिंहभूम का कोल्हान और सारंडा क्षेत्र अभी भी सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

इस साल सारंडा अभियान में कई बड़े नक्सली मारे गए
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इस वर्ष सारंडा में चलाए गए बड़े अभियान के दौरान एक करोड़ रुपये के इनामी केंद्रीय कमेटी सदस्य अनल उर्फ पतिराम मांझी समेत कई नक्सली मारे गए थे। इसके बाद माओवादी संगठन की ताकत में उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि, एजेंसियों का मानना है कि जंगलों में मौजूद बचे हुए दस्तों के खिलाफ अभियान अभी जारी रहेगा। केंद्र सरकार ने भी देश से नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य तय करते हुए सुरक्षा अभियान को अंतिम चरण तक पहुंचाने पर जोर दिया है।

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