टाटा स्टील को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, 890 करोड़ रुपये की GST वसूली पर अंतरिम रोक

Rupa Kumari | June 30, 2026 | 12:55 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, जमशेदपुर : देश की प्रमुख इस्पात कंपनी टाटा स्टील को केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने CGST विभाग द्वारा जारी 890 करोड़ रुपये की वसूली के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति पी. एम. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कंपनी को तत्काल राहत प्रदान की। इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने टाटा स्टील की याचिका खारिज कर कंपनी को वैकल्पिक अपीलीय मंच पर जाने की सलाह दी थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

क्या है पूरा मामला?

विवाद वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2020-21 के दौरान इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के कथित गलत उपयोग से जुड़ा है। CGST विभाग ने ऑडिट के दौरान कंपनी द्वारा दाखिल GSTR-2A और GSTR-3B रिटर्न का मिलान किया, जिसमें ITC लाभ लेने में कथित अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने CGST अधिनियम की धारा 74 के तहत कार्रवाई शुरू करते हुए कंपनी को डिमांड नोटिस जारी किया था।

890 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश

मामले की सुनवाई CGST के संयुक्त आयुक्त स्तर पर हुई। विभाग ने जांच के बाद टाटा स्टील पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए करीब 890 करोड़ रुपये की वसूली का आदेश दिया। इसके साथ ही CGST की धारा 50 के तहत ब्याज और अन्य दंडात्मक प्रावधान भी लागू किए गए। कंपनी ने अपने बचाव में कहा कि उसके मामले में CGST की धारा 74 लागू ही नहीं होती, क्योंकि इस धारा के लिए जरूरी कानूनी शर्तें पूरी नहीं होती हैं। साथ ही कंपनी ने क्षेत्राधिकार और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का भी मुद्दा उठाया। टाटा स्टील का तर्क था कि विभाग ने बिना पर्याप्त आधार के धारा 74 के तहत कार्रवाई की, जो कानून की भावना के अनुरूप नहीं है।

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हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

26 दिसंबर 2025 को जारी वसूली आदेश को चुनौती देते हुए कंपनी ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर वैधानिक अपील का रास्ता अपनाने की सलाह दी। इसके बाद कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की, जहां उसे फिलहाल राहत मिल गई है। अब इस मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई के बाद होगा। तब तक 890 करोड़ रुपये की वसूली पर रोक बनी रहेगी।

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