Samachar Post रिपोर्टर, गढ़वा : जिले के खरौंधी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में शुक्रवार को 100 से अधिक छात्राओं की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। छात्राओं को पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और बेचैनी की शिकायत के बाद विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, छात्राओं के बीमार होने के पीछे फूड प्वाइजनिंग और भीषण गर्मी के बीच अत्यधिक गर्म पानी पीना संभावित कारण माना जा रहा है। हालांकि, वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच और चिकित्सीय रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
एक साथ कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ने से मचा हड़कंप
जानकारी के मुताबिक, 300 छात्राओं वाले इस आवासीय विद्यालय में शुक्रवार शाम अचानक बड़ी संख्या में छात्राओं की तबीयत खराब होने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें भवनाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और अन्य सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। घटना के बाद विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि छात्राओं की तबीयत बिगड़ने के बावजूद समय पर उचित कदम नहीं उठाए गए।
छात्राओं ने भोजन और पानी को बताया कारण
अस्पताल में भर्ती छात्राओं के अनुसार, दोपहर के भोजन में उन्हें पुआ और चावल दिया गया था। वहीं, क्षेत्र में बिजली बाधित रहने और तेज गर्मी के कारण पानी की टंकी का पानी काफी गर्म हो गया था, जिसे पीने के लिए छात्राएं मजबूर थीं। कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि शाम के समय पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं था और जेनरेटर होने के बावजूद पानी की आपूर्ति और अन्य आवश्यक सुविधाओं का समुचित उपयोग नहीं किया गया। घटना की सूचना मिलने के बाद भवनाथपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचलाधिकारी अस्पताल पहुंचे तथा इलाज की व्यवस्था की समीक्षा की। अधिकारियों ने चिकित्सकों को सभी छात्राओं का समुचित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
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डॉक्टरों ने क्या कहा?
भवनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला फूड प्वाइजनिंग और अत्यधिक गर्म या दूषित पानी के सेवन से जुड़ा प्रतीत होता है। सभी छात्राओं का इलाज किया जा रहा है और अधिकांश की स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

जांच और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते उचित प्रबंधन किया जाता तो इतनी बड़ी संख्या में छात्राएं बीमार नहीं पड़तीं। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और छात्राओं के बीमार होने के कारणों का पता लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

