जामताड़ा में जामुन सिरका बना ग्रामीण महिलाओं की ताकत, बर्बादी से समृद्धि की नई कहानी

Meenu | June 19, 2026 | 03:15 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर,जामताड़ा :झारखंड के जामताड़ा जिले में ग्रामीण महिलाओं ने एक अनोखी पहल से बर्बादी को समृद्धि में बदल दिया है। कभी बेकार जाने वाला जामुन अब यहां की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और आजीविका का मजबूत साधन बन गया है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के सहयोग से सखी मंडल की दीदियां अब जामुन से प्राकृतिक सिरका तैयार कर रही हैं। हर साल जामताड़ा के ग्रामीण इलाकों में बड़ी मात्रा में जामुन उचित बाजार और संरक्षण व्यवस्था के अभाव में बर्बाद हो जाते थे। लेकिन इस बार सखी मंडलों ने इसे अवसर में बदलने की पहल की। महिलाओं ने विभिन्न प्रखंडों से जामुन एकत्रित कर फतेहपुर स्थित आजीविका सेवा केंद्र (ASK) में इसे प्रसंस्करण के लिए भेजा, जहां जामुन सिरका तैयार करने का कार्य शुरू किया गया।

यह भी पढ़ें :राज्यसभा चुनाव के बाद बढ़ी तकरार, राजेश ठाकुर बोले- जहां विश्वास होता है, वहीं धोखा भी मिलता है

प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद

ASK केंद्र में तैयार किया जा रहा जामुन सिरका पूरी तरह प्राकृतिक और शुद्ध है। इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जा रहा है, विशेषकर मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों के लिए यह उपयोगी बताया जा रहा है। इसके अलावा यह पाचन तंत्र को सुधारने, पेट संबंधी समस्याओं में राहत देने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है। बाजार में इस तरह के प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए इसे अच्छा व्यावसायिक अवसर माना जा रहा है।

महिलाओं को मिला रोजगार और आत्मनिर्भरता

इस पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। जामुन संग्रहण, छंटाई, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और उत्पादन के विभिन्न चरणों में दर्जनों ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इससे न केवल महिलाओं की आय बढ़ रही है, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हो रहा है। सखी मंडल की महिलाओं का कहना है कि वे इस उत्पाद को आगे चलकर एक बड़े ब्रांड के रूप में विकसित करना चाहती हैं।

JSLPS की पहल से बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) की इस पहल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। महिलाओं की यह पहल ‘लोकल फॉर वोकल’ के विचार को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय संसाधनों से मूल्यवर्धन का बेहतरीन उदाहरण बन रही है। जामताड़ा की सखी मंडल की दीदियों की यह पहल न सिर्फ आर्थिक सशक्तिकरण की कहानी है, बल्कि ग्रामीण विकास की एक प्रेरणादायक मिसाल भी बन रही है। प्रशासन और JSLPS के सहयोग से यह मॉडल आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

Share this news

संबंधित खबरें