प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर अर्जुन मुंडा की पहल, श्रम विभाग से मांगी मजबूत सहायता व्यवस्था

Rupa Kumari | June 12, 2026 | 03:35 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने राज्य से बाहर काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और कल्याण का मुद्दा उठाया है। उन्होंने श्रमायुक्त को पत्र लिखकर प्रवासी मजदूरों के लिए प्रभावी सहायता तंत्र विकसित करने और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित मदद सुनिश्चित करने की मांग की है।

दो प्रवासी श्रमिकों की मौत का उठाया मुद्दा

6 जून 2026 को लिखे गए पत्र में अर्जुन मुंडा ने हाल ही में हुई दो प्रवासी श्रमिकों की मौत का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने राज्य से बाहर काम कर रहे श्रमिकों के लिए उपलब्ध सहायता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पत्र के अनुसार, सरायकेला-खरसावां जिले के हलुदबनी निवासी विशाल महतो की आंध्र प्रदेश के तिरुपति के पास ट्रेन यात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी। वहीं, पूर्वी सिंहभूम के आसनबनी निवासी कार्तिक मुंडा, जो आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में कार्यरत थे, उनका भी असामयिक निधन हो गया।

शव लाने में परिवारों को हुई परेशानी

अर्जुन मुंडा ने कहा कि दोनों मृतकों के पार्थिव शरीर को उनके गृह जिले तक पहुंचाने में परिवारों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि परिजनों की ओर से संपर्क किए जाने के बाद उनके कार्यालय ने संबंधित राज्यों के प्रशासन से समन्वय स्थापित किया, जिसके बाद शवों को झारखंड लाया जा सका। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं दर्शाती हैं कि प्रवासी श्रमिकों के लिए आपातकालीन सहायता प्रणाली को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

सरकार से मांगा प्रवासी श्रमिकों का डिजिटल रिकॉर्ड

पूर्व मुख्यमंत्री ने श्रम विभाग से सवाल किया है कि क्या राज्य सरकार के पास बाहर काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों का कोई अद्यतन और केंद्रीकृत डिजिटल डाटाबेस उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास यह जानकारी होनी चाहिए कि राज्य के कितने लोग दूसरे राज्यों में कार्यरत हैं, वे किन कंपनियों या संस्थानों में काम कर रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर उनसे या उनके नियोक्ताओं से कैसे संपर्क किया जा सकता है।

24×7 हेल्पलाइन की जरूरत बताई

अर्जुन मुंडा ने पत्र में यह भी पूछा है कि क्या प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए कोई 24×7 टोल-फ्री हेल्पलाइन संचालित की जा रही है। उनका कहना है कि यदि ऐसी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है तो संकट की स्थिति में श्रमिकों और उनके परिजनों के लिए सरकार तक अपनी समस्या पहुंचाना कठिन हो सकता है। उन्होंने एक सशक्त हेल्पलाइन व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि राज्य से बाहर काम करने वाले सभी प्रवासी श्रमिकों के लिए अनिवार्य पंजीकरण व्यवस्था लागू की जाए। पंचायत स्तर तक पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जाए और सभी श्रमिकों का केंद्रीकृत डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे दुर्घटना, बीमारी या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावित श्रमिकों तक समय पर सहायता पहुंचाना आसान होगा।

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प्रवासी श्रमिकों को बताया राज्य की ताकत

अर्जुन मुंडा ने अपने पत्र में कहा कि प्रवासी श्रमिक झारखंड की अर्थव्यवस्था और समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे देश के विभिन्न राज्यों में काम कर अपने परिवारों के साथ-साथ राज्य की आर्थिक मजबूती में भी योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि संकट के समय उनकी सुरक्षा, सम्मान और समय पर सहायता सुनिश्चित करना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकार और समाज दोनों का नैतिक दायित्व है। साथ ही उन्होंने श्रम विभाग से वर्तमान व्यवस्थाओं, उपलब्ध आंकड़ों और भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी भी मांगी है।

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