अंकुश शर्मा हत्याकांड में पुलिस को झटका, CCTV फुटेज पेश नहीं होने पर दो आरोपी बरी

Rupa Kumari | June 9, 2026 | 02:53 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : रांची के चर्चित अंकुश शर्मा हत्याकांड में अदालत ने दो आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस उस CCTV फुटेज को अदालत में पेश नहीं कर सकी, जिसे जांच का अहम आधार बताया गया था। पर्याप्त और ठोस साक्ष्य नहीं मिलने पर कोर्ट ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए रिहा करने का आदेश दिया।

CCTV फुटेज नहीं दिखा सकी जांच एजेंसी

सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच अधिकारी (आईओ) से उस CCTV फुटेज को प्रस्तुत करने को कहा, जिसके आधार पर आरोपियों की संलिप्तता का दावा किया गया था। हालांकि पुलिस अदालत में संबंधित फुटेज उपलब्ध नहीं करा सकी। अदालत ने माना कि जब जांच एजेंसी अपने सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य को ही प्रस्तुत नहीं कर पाती है, तो अभियोजन पक्ष का दावा कमजोर पड़ जाता है। ऐसे में आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो सके।

CCTV के आधार पर पुलिस ने किया था दावा

जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया था कि आरोपियों की गतिविधियां CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हुई थीं और इन्हीं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उनकी भूमिका सामने आई थी। लेकिन अदालत में इस दावे को प्रमाणित करने के लिए आवश्यक फुटेज पेश नहीं किया जा सका। इस वजह से कोर्ट ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

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संदेह का लाभ देते हुए सुनाया फैसला

भारतीय न्याय व्यवस्था के अनुसार किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए आरोपों का संदेह से परे साबित होना आवश्यक होता है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को पर्याप्त रूप से सिद्ध करने में असफल रहा है, इसलिए दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी करने का आदेश पारित किया। अदालत के इस फैसले का असर केवल बरी किए गए दो आरोपियों तक सीमित है। हत्याकांड से जुड़े अन्य आरोपियों और मामले के विभिन्न पहलुओं पर कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।

जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल

फैसले के बाद एक बार फिर गंभीर आपराधिक मामलों की जांच और साक्ष्य संरक्षण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना तथा समय पर अदालत में पेश करना जांच एजेंसियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विशेषज्ञों के अनुसार कई मामलों में ऐसे अहम सबूतों की अनुपस्थिति पूरी जांच और मुकदमे की दिशा बदल सकती है। अंकुश शर्मा हत्याकांड में आए इस फैसले ने भी साक्ष्य प्रबंधन और जांच की गुणवत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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