Samachar Post रिपोर्टर, गिरिडीह : गिरिडीह जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की बदहाल तस्वीर सामने आई है। पीरटांड़ प्रखंड के मधुबन थाना क्षेत्र स्थित दालुवाडीह गांव में सड़क नहीं होने के कारण गर्भवती महिला को खटिया पर लिटाकर करीब चार किलोमीटर तक पैदल ले जाना पड़ा।जानकारी के अनुसार, दालुवाडीह गांव निवासी सुनीता सोरेन को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तुरंत एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने का हवाला देते हुए एंबुलेंस आने से मना कर दिया गया।
खटिया पर लिटाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया
महिला की हालत बिगड़ती देख ग्रामीणों और परिवार के लोगों ने मजबूरी में खटिया को ही एंबुलेंस बना लिया। उबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरते हुए परिजन सुनीता सोरेन को करीब चार किलोमीटर दूर पिपराडीह मुख्य सड़क तक लेकर पहुंचे। वहां से किसी तरह वाहन की व्यवस्था कर उन्हें अस्पताल भेजा गया। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव तक सड़क बनी होती तो एंबुलेंस सीधे घर तक पहुंच सकती थी और महिला को समय पर इलाज मिल जाता।
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सड़क नहीं होने से कई गांव प्रभावित
स्थानीय लोगों के मुताबिक पिपराडीह तक सड़क बनी हुई है, लेकिन उसके आगे आज तक सड़क निर्माण नहीं हुआ। इसका असर दालुवाडीह समेत कुरुवारांड, डाहिया, ईटाबेड़ा, गाड़ापरोम, सहेरबेड़ा, जिरबेड़ा, सतकटिया और बोरवाबेड़ा जैसे कई गांवों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है।
ग्रामीणों ने दी वोट बहिष्कार की चेतावनी
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में गांव की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क निर्माण नहीं कराया गया तो आने वाले चुनाव में वे “रोड नहीं तो वोट नहीं” के नारे के साथ मतदान का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई मरीजों को खटिया पर ढोकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।