Samachar Post रिपोर्टर, रांची :रांची में निजी स्कूलों की मनमानी पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में साफ कर दिया गया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई होगी। इसमें जुर्माना से लेकर मान्यता रद्द करने तक के कदम शामिल हैं। बैठक में स्पष्ट किया गया कि स्कूल स्तर की समिति अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकती है। इसके अलावा अगली कक्षा में प्रोन्नति के नाम पर किसी भी तरह का पुनः नामांकन शुल्क लेना पूरी तरह गलत माना जाएगा। प्रशासन ने यह भी कहा कि किसी छात्र को वार्षिक परीक्षा में बैठने से रोकना नियमों के खिलाफ है।
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फीस का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य
सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों और सत्र 2026-27 की फीस का पूरा विवरण 20 अप्रैल तक प्रशासन को उपलब्ध कराएं। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि स्कूल परिसर में किताबों और यूनिफॉर्म की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। अभिभावकों को किसी एक दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। साथ ही Central Board of Secondary Education से जुड़े स्कूलों को केवल NCERT की पुस्तकों को ही पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्देश दिया गया है।
शिकायतों पर जवाब देना होगा अनिवार्य
अब ‘अबुआ साथी’ पोर्टल और जिला स्तर पर मिलने वाली शिकायतों पर स्कूलों को साक्ष्य के साथ जवाब देना होगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर 50 हजार से 2.5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में आरटीई से जुड़ी मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
प्रशासन ने सभी स्कूलों को तीन दिनों के भीतर पीटीए और स्कूल स्तरीय शुल्क समिति का गठन कर इसकी जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। इस पहल को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अभिभावकों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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