Samachar Post रिपोर्टर, रांची: झारखंड में कथित शराब घोटाले को लेकर सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है और जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की सिफारिश की है।
ACB की भूमिका पर उठाए सवाल
मरांडी ने अपने पत्र में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जांच एजेंसी भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने के बजाय उन्हें बचाने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ACB ने जानबूझकर साक्ष्यों और कानूनी समय-सीमा के साथ समझौता किया, जिससे आरोपियों को राहत मिली।
यह भी पढ़ें: JMM का 53वां स्थापना दिवस: गिरिडीह में भव्य आयोजन, हजारों कार्यकर्ताओं की जुटान
डिफॉल्ट बेल से बाहर आए आरोपी
मरांडी के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी IAS विनय कुमार चौबे समेत अन्य अधिकारियों को अदालत से डिफॉल्ट बेल मिल गई। उन्होंने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 187(2) के तहत 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना जरूरी था, लेकिन 8 महीने बीत जाने के बाद भी ऐसा नहीं हुआ। इसका फायदा उठाते हुए 17 में से 14 आरोपी जेल से बाहर आ चुके हैं।
38 करोड़ से 750 करोड़ तक पहुंचा घोटाला
मरांडी ने दावा किया कि शुरुआत में 38 करोड़ रुपये का बताया गया यह घोटाला अब बढ़कर 750 करोड़ रुपये से अधिक का हो गया है। उन्होंने 2022 की उत्पाद नीति में बदलाव को इस पूरे मामले की जड़ बताया। पत्र में छत्तीसगढ़ के कारोबारी नवीन केडिया का भी जिक्र करते हुए कहा गया है कि ट्रांजिट बेल मिलने के बाद वह फरार हो गया और ACB उसे पकड़ने में नाकाम रही है।
राज्यपाल से की ये मांग
नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल से मांग की है कि ACB को तत्काल चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए और पूरे मामले की जांच CBI को सौंपी जाए। मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के संरक्षण में इस घोटाले को दबाने की कोशिश की जा रही है, जिससे कानून व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है।
Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।