Samachar Post रिपोर्टर,पलामू :पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड में खनन विभाग के एक फैसले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। जिन स्थानों पर बालू का अस्तित्व तक नहीं है, वहां 7 जगहों को केटेगरी-1 बालू घाट घोषित कर दिया गया है। इस आदेश के बाद स्थानीय स्तर पर इसे गंभीर प्रशासनिक चूक बताया जा रहा है। जिला खनन कार्यालय द्वारा 13 फरवरी 2026 को जारी आदेश के तहत बकोरिया, घुटुआ और रेवारातू पंचायतों में कुल 7 स्थलों को बालू घाट के रूप में चिन्हित किया गया है। इनमें घुटुआ पंचायत में 4, बकोरिया में 2 और रेवारातू में 1 घाट शामिल है। हालांकि, जमीनी हकीकत इस फैसले से बिल्कुल अलग नजर आ रही है, जिससे पूरे मामले पर सवाल उठने लगे हैं।
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न नदी, न बालू… फिर कैसे बना घाट?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन जगहों को बालू घाट घोषित किया गया है, वहां न तो कोई नदी है और न ही बालू का कोई स्थायी स्रोत मौजूद है। जानकारों के मुताबिक, इलाके में बालू का मुख्य स्रोत औरंगा नदी है, जो इन चिन्हित स्थानों से अलग क्षेत्रों से होकर गुजरती है। ऐसे में बिना भौगोलिक आधार के घाट घोषित करना समझ से परे माना जा रहा है। इस फैसले को लेकर पंचायत प्रतिनिधियों में भी नाराजगी है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जिन स्थानों को घाट बताया गया है, वहां से एक ट्रैक्टर बालू निकालना भी संभव नहीं है। कुछ क्षेत्रों में पहले बालू मिलता था, लेकिन अब वह लगभग समाप्त हो चुका है। ऐसे में बिना ताजा सर्वे के घाट घोषित करना पूरी तरह गलत निर्णय बताया जा रहा है।
पुरानी रिपोर्ट पर लिया गया फैसला?
सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय करीब तीन साल पुरानी रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। बिना मौके की नई जांच किए ही कागजों पर घाट घोषित कर दिए गए। जिला खनन पदाधिकारी का कहना है कि अगर मौके पर बालू उपलब्ध होगा तभी उसका उठाव किया जाएगा, अन्यथा यह संभव नहीं होगा।
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