Samachar Post रिपोर्टर, रांची: रांची यूनिवर्सिटी में नागपुरी भाषा की शिक्षा व्यवस्था में गंभीर समस्या सामने आई है। हाल ही में कोर्ट के आदेश और जेपीएससी की अनुशंसा के बाद पीजी नागपुरी विभाग में डॉ. मनोज कुमार कच्छप की नियुक्ति हुई। हालांकि यह नियुक्ति लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हुई, लेकिन सवाल यह उठता है कि जिन कॉलेजों में नागपुरी विषय के लिए शिक्षक बिल्कुल नहीं हैं, वहां प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद नियुक्ति
डॉ. मनोज कुमार कच्छप को असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों में सबसे अधिक अकादमिक पॉइंट मिले थे। इसके बावजूद यूनिवर्सिटी में नियुक्ति के लिए उन्हें लंबा संघर्ष करना पड़ा। मामला अदालत तक गया और अंततः JPSC ने उनकी नियुक्ति की अनुशंसा की।
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शिक्षक विहीन कॉलेज
यूनिवर्सिटी से जुड़े सिमडेगा कॉलेज और मांडर कॉलेज में नागपुरी विषय के लिए कोई स्थायी या नीड-बेस्ड शिक्षक नहीं है। यहां स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के छात्र बिना शिक्षक के पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद यूनिवर्सिटी ने नियुक्ति वहां नहीं बल्कि ऐसे विभाग में की जहां पहले से तीन शिक्षक कार्यरत थे।
पिछली गलत प्राथमिकताएं
ऐसी स्थिति इससे पहले भी देखी गई थी। डोरंडा कॉलेज में तीन शिक्षक होने के बावजूद चौथे शिक्षक की नियुक्ति कर दी गई। बार-बार यही समस्या सामने आने से छात्र और शिक्षा जगत सवाल उठा रहे हैं कि जिन कॉलेजों में नागपुरी विषय पूरी तरह शिक्षक विहीन है, वहां नियुक्ति क्यों नहीं हो रही।
छात्रों और भाषा के भविष्य पर असर
शिक्षाविदों और भाषा प्रेमियों का कहना है कि शिक्षक की कमी न केवल प्रशासनिक असंतुलन दिखाती है, बल्कि नागपुरी विषय के छात्रों के भविष्य और भाषा के विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। छात्र लंबे समय से शिक्षक की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि जिन कॉलेजों में नागपुरी विषय के छात्र बिना शिक्षक के पढ़ाई कर रहे हैं, वहां तुरंत शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। इस समस्या का समाधान न होने पर न केवल छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा, बल्कि नागपुरी भाषा के संरक्षण और विकास पर भी संकट पैदा हो सकता है।
Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।