धनबाद में बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर उबाल, जनसुनवाई में जोरदार विरोध

Rupa Kumari | February 28, 2026 | 11:49 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, धनबाद: घरेलू बिजली दरों में करीब 60 फीसदी बढ़ोतरी के प्रस्ताव के खिलाफ शनिवार को धनबाद में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कोयला नगर स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित जनसुनवाई के दौरान सैकड़ों उपभोक्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। यह जनसुनवाई झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से आयोजित की गई थी, जिसमें बिजली दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी पर लोगों से सुझाव और आपत्तियां ली गईं।

6.85 से 10.30 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव

उपभोक्ताओं ने अधिकारियों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि घरेलू बिजली दर 6.85 रुपये से बढ़ाकर सीधे 10.30 रुपये प्रति यूनिट करना आम जनता पर सीधा आर्थिक हमला है। लोगों का कहना था कि पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता पर इतनी बड़ी वृद्धि अस्वीकार्य है।

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छोटे और मंझोले उद्योगों पर संकट

सुनवाई में चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों केसी गोयल, विश्वजीत सरकार, शिवचरण शर्मा, विवेक लोढ़ा और दीपक कुमार गुप्ता ने चेतावनी दी कि यदि प्रस्ताव लागू हुआ तो जिले के छोटे और मंझोले उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे। उनका सवाल था कि जब बिजली आपूर्ति अब भी निर्बाध नहीं है, तो फिक्स्ड चार्ज और यूनिट दर में भारी वृद्धि किस आधार पर की जा रही है?

बिजली चोरी और विभागीय खामियों पर सवाल

जनसुनवाई के दौरान विभागीय कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठे। शिकायतकर्ता संतोष कुशवाहा ने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा दिखाया गया 8,712 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा बिजली चोरी और भ्रष्टाचार का नतीजा है। उपभोक्ताओं का कहना था कि लाइन लॉस और बिजली चोरी में विभाग के कुछ कर्मियों की मिलीभगत की जांच होनी चाहिए, न कि उसका बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं पर डाला जाए।

आयोग ने दिया राहत का आश्वासन

विरोध को देखते हुए आयोग के सदस्यों ने भरोसा दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत राजस्व घाटे को अगले सात वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समायोजित किया जाएगा, ताकि जनता पर अचानक बोझ न पड़े। साथ ही यह घोषणा भी की गई कि अगले छह महीनों में धनबाद में एक विशेष उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम शुरू किया जाएगा। इससे लोगों को शिकायतों के समाधान के लिए हजारीबाग जाने की आवश्यकता नहीं होगी। आयोग ने नंगे तारों को बदलने और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शुरुआती तकनीकी समस्याओं को जल्द दूर करने का भी आश्वासन दिया।

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