Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में निजी स्कूलों में बीपीएल (गरीब) बच्चों के लिए आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर नामांकन को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। विधायक नीरा यादव और शशिभूषण कुशवाहा ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
‘लॉटरी प्रक्रिया में गड़बड़ी?’
नीरा यादव ने सदन में पूछा कि जब चयन प्रक्रिया लॉटरी के माध्यम से होती है, तो एक विशेष समुदाय के 75 प्रतिशत बच्चों का चयन कैसे हो रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सिफारिश के आधार पर प्रवेश दिए जा रहे हैं, तो इससे पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
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मंत्री का जवाब: प्रक्रिया पारदर्शी
मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि नामांकन प्रक्रिया स्कूल प्रबंधन की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से की जाती है। यदि किसी अभिभावक को चयन को लेकर संदेह है, तो वे सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि किसी भी विशेष शिकायत की गंभीरता से जांच की जाएगी और गड़बड़ी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
निष्पक्षता की मांग
विधायकों ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए आरक्षित सीटों का सही लाभ मिलना सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की सिफारिश या पक्षपात की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। सदन में उठे इस मुद्दे ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समान अवसर को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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