भारत-रूस संबंधों को नई गति : प्रस्तावित FTA पर बातचीत तेज करने पर सहमति

Rupa Kumari | December 6, 2025 | 11:26 AM IST
  • FTA पर तेजी से बातचीत की सहमति

Samachar Post डेस्क, रांची : नई दिल्ली में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि भारत और रूस ने भारत तथा यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर वार्ता को तेज करने का निर्णय लिया है। यह फैसला रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दो दिवसीय भारत दौरे के बाद लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक है।

ट्रेड डेफिसिट कम करने पर जोर

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि बातचीत में FTA मुख्य केंद्र में रहा। उन्होंने कहा कि, FTA भारत-रूस व्यापार में संतुलन लाने में मदद करेगा। टर्म्स ऑफ रेफरेंस को अंतिम रूप देकर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।

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निवेश और कनेक्टिविटी पर अहम चर्चाएं

द्विपक्षीय निवेश संधि को मजबूत करने पर दोनों देशों ने सहमति जताई। इसके साथ ही इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) की समीक्षा, ट्रांजिट समय घटाने पर चर्चा, यूरेशिया में भारत की व्यापारिक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया।

मोदी–पुतिन की अनौपचारिक वार्ता

प्रधानमंत्री मोदी ने एयरपोर्ट पर स्वयं राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत किया। बाद में पीएम आवास पर हुए अनौपचारिक रात्रिभोज में द्विपक्षीय संबंध, क्षेत्रीय मुद्दे, वैश्विक चुनौतियाँ पर लंबी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया।

वैश्विक मंचों पर सहयोग और संयुक्त राष्ट्र सुधार

मोदी और पुतिन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सुधार की आवश्यकता पर बल दियादिया गया। G20, ब्रिक्स और SCO में परस्पर सहयोग बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

रक्षा सहयोग: साझेदारी का मजबूत स्तंभ

दोनों देशों ने रक्षा सहयोग पर गहराई से चर्चा की। रूस ने भारत के मेक इन इंडिया के तहत संयुक्त उत्पादन सैन्य तकनीक ट्रांसफर को बढ़ावा देने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही कजान और येकातेरिनबर्ग में दो नए भारतीय कॉन्सुलेट खोलने की प्रक्रिया तेज करने पर भी सहमति बनी।

यूक्रेन मुद्दे पर भारत का स्पष्ट रुख

राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन संघर्ष पर ताजा जानकारी साझा की। प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। पीएम मोदी ने आतंकवाद पर भारत की कड़ी नीति का उल्लेख किया। रूस ने भी इस रुख का पुरजोर समर्थन किया।

निष्कर्ष : रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा

विदेश सचिव मिसरी ने कहा कि मौजूदा वैशgeo-राजनैतिक माहौल में भारत-रूस साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण है। यह दौरा आर्थिक सहयोग, व्यापारिक साझेदारी रणनीतिक संबंधों को नई गति देने वाला साबित हुआ।

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