Samachar Post रिपोर्टर, बिहार : बिहार के समस्तीपुर जिले में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कथित ठगी और अवैध रूप से लोगों को रखने का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सूचना पर कार्रवाई करते हुए 105 युवक-युवतियों को विभिन्न ठिकानों से मुक्त कराया है। इस मामले में तीन महिलाओं समेत नौ लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि गिरोह का कथित सरगना आर्यन फरार बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देकर समस्तीपुर बुलाया गया था। बाद में उनसे पैसे वसूले गए और उनके दस्तावेज तथा मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए गए थे।
105 अभ्यर्थियों को कराया गया रेस्क्यू
मुफस्सिल थाना क्षेत्र के धरमपुर और मुसापुर इलाके में स्थित दस अलग-अलग ठिकानों पर पुलिस ने छापेमारी की। बुधवार रात से शुरू हुआ अभियान गुरुवार सुबह तक चला। रेस्क्यू किए गए लोगों में 67 युवक और 38 युवतियां शामिल हैं। इनमें 39 नाबालिग भी बताए जा रहे हैं। पुलिस ने सभी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि असम, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के युवक-युवतियों को नौकरी का लालच देकर समस्तीपुर बुलाया गया था। पुलिस के मुताबिक, अधिकांश पीड़ित असम के तामुलपुर, मंगलदोई, भैरवकुंड, उदालगुड़ी, तिनसुकिया और दिमाकुची क्षेत्रों के रहने वाले हैं। उनसे कथित तौर पर मोटी रकम जमा कराई गई थी।
मानवाधिकार आयोग की सूचना से खुला मामला
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से जुड़े एक सदस्य ने अभ्यर्थी बनकर पूरे नेटवर्क की पड़ताल की थी। उन्होंने नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार के रूप में संबंधित कार्यालयों और ठिकानों का दौरा किया। बताया जा रहा है कि उनसे भी नौकरी दिलाने के नाम पर 25 हजार रुपये जमा करने को कहा गया था। इसके बाद मामले की जानकारी संबंधित एजेंसियों और पुलिस तक पहुंची, जिसके बाद कार्रवाई की गई।

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पुलिस ने दर्ज किया मामला
अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) संजय कुमार पांडेय ने बताया कि मानव तस्करी, अवैध रूप से लोगों को रोककर रखने, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। रेस्क्यू अभियान में छह थानों की पुलिस और 150 से अधिक जवान शामिल रहे। वहीं पुलिस अधीक्षक अमरेंद्र प्रताप सिंह ने भी पीड़ितों से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली।
फरार सरगना की तलाश में SIT गठित
पुलिस ने बताया कि गिरोह के कथित सरगना आर्यन की गिरफ्तारी के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। मामले में अन्य संभावित आरोपियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भी पहचान की जा रही है। पुलिस ने जिन मकानों में युवाओं को रखा गया था, उन्हें फिलहाल सील कर दिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।

