रिम्स में कथित फर्जी नामांकन और टेंडर घोटाले की जांच तेज, CID के रडार पर कई अधिकारी

Meenu | June 26, 2026 | 10:27 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची :झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) में कथित फर्जी नामांकन और करोड़ों रुपये के टेंडर आवंटन से जुड़े मामलों की जांच अब तेज हो गई है। सीआईडी (CID) की प्रारंभिक जांच में कई अहम दस्तावेज सामने आए हैं, जिनकी गहन पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच में ऐसे तथ्य मिले हैं जो प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं की ओर संकेत कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, जांच टीम ने रिम्स प्रशासन से बड़ी संख्या में आधिकारिक फाइलें और रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। इन दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद एफआईआर दर्ज होने और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की संभावना जताई जा रही है।

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दो मामलों पर CID का मुख्य फोकस

सीआईडी फिलहाल दो प्रमुख मामलों की जांच कर रही है। पहला मामला वर्ष 2025 में कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिले से जुड़ा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रवेश प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ या किसी संगठित नेटवर्क के जरिए फर्जी नामांकन कराया गया। दूसरा मामला रिम्स की सफाई व्यवस्था से जुड़े करोड़ों रुपये के टेंडर का है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान नियमों में बदलाव कर कुछ चुनिंदा एजेंसियों को फायदा पहुंचाया गया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि नियमों में बदलाव किस स्तर पर हुआ और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार था। सूत्रों के अनुसार, सीआईडी यह भी जांच कर रही है कि फर्जी नामांकन किसी बड़े रैकेट का हिस्सा था या नहीं। साथ ही टेंडर प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और संबंधित पक्षों की भूमिका की भी विस्तार से पड़ताल की जा रही है।

रिम्स निदेशक के इस्तीफे पर भी उठ रहे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बीच रिम्स निदेशक के इस्तीफे ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि इस्तीफे के कारणों को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जांच एजेंसी उपलब्ध दस्तावेजों और घटनाक्रम को जोड़कर पूरे मामले की कड़ियां तलाश रही है।

FIR दर्ज होने पर बढ़ सकती हैं कई अधिकारियों की मुश्किलें

अब सभी की नजर सीआईडी की अगली कार्रवाई पर है। यदि दस्तावेजों की जांच के बाद नियमित एफआईआर दर्ज होती है, तो रिम्स से जुड़े कई अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

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