Samachar Post डेस्क, बिहार : बिहार के मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल स्थित मातृ-शिशु सदन में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला को कथित तौर पर घंटों तक इलाज नहीं मिला, जिसके बाद परिजनों को मजबूर होकर उसे निजी अस्पताल ले जाना पड़ा।
सुबह भर्ती हुई, शाम तक नहीं मिला उपचार
पीड़िता की पहचान शाहीन प्रवीण के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें मातृ-शिशु सदन में भर्ती कराया गया था। प्रारंभिक जांच के बाद बताया गया कि महिला का ऑपरेशन करना पड़ सकता है, लेकिन उस समय कोई चिकित्सक उपलब्ध नहीं था। परिजनों का आरोप है कि महिला करीब 8 घंटे तक दर्द से कराहती रही, लेकिन इलाज की व्यवस्था नहीं हो सकी।
एंबुलेंस नहीं मिलने का भी आरोप
महिला की स्थिति बिगड़ती देख परिजनों ने उसे दूसरे अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। उनका आरोप है कि सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग की गई, लेकिन उन्हें बताया गया कि सरकारी एंबुलेंस निजी अस्पताल तक नहीं जाएगी। इसके बाद परिवार ने ऑटो की व्यवस्था कर महिला को निजी अस्पताल पहुंचाया। परिवार का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए निजी अस्पताल का खर्च उठाना आसान नहीं है। उनका आरोप है कि यदि सरकारी अस्पतालों में समय पर इलाज नहीं मिलेगा तो गरीब मरीजों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
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अस्पताल प्रबंधन ने शिकायत से किया इनकार
मामले पर अस्पताल प्रबंधन के अधिकारी प्रवीण कुमार ने कहा कि उन्हें इस संबंध में किसी मरीज या परिजन की ओर से कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
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