- 120 कॉलेजों की हुई थी जांच, आधे में मिली थी गंभीर खामियां; और संस्थानों पर भी गिर सकती है गाज
Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में फार्मेसी शिक्षा के नाम पर चल रहे कथित खेल पर आखिरकार स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य के 34 फार्मेसी कॉलेजों का लेटर ऑफ कंसेंट रद्द कर दिया गया है। विभागीय जांच में इन संस्थानों में आधारभूत संरचना, प्रयोगशाला, उपकरण, योग्य शिक्षकों और शैक्षणिक मानकों से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आई हैं। हालांकि मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई अभी शुरुआत है। राज्य में संचालित करीब 120 फार्मेसी कॉलेजों की जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को सौंपी जा चुकी है और कई अन्य संस्थानों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। सूचना है कि एक माह के भीतर और भी 25 से 30 कॉलेजों का लेटर ऑफ कंसेंट रद्द किया जा सकता है।
बता दें डिप्लोमा इन फार्मेसी परीक्षा समिति के सदस्य सचिव द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित संस्थानों ने फार्मेसी एक्ट, 1948 की धारा 10 व 12 तथा फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित शिक्षा विनियमों के अनुरूप आवश्यक मानकों का पालन नहीं किया। समिति का मानना है कि ऐसे संस्थानों को अनुमति देना छात्रों के शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य के साथ समझौता करने जैसा होगा। इसी आधार पर 34 संस्थानों के पक्ष में पूर्व में जारी लेटर ऑफ कंसेंट को आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
निरीक्षण में हुई थी गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि
विभागीय दस्तावेजों के अनुसार जांच के दौरान कई कॉलेज फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानकों को पूरा नहीं कर सके। कुछ संस्थानों में पर्याप्त आधारभूत संरचना का अभाव मिला, जबकि कई जगहों पर योग्य एवं नियमानुसार फैकल्टी की उपलब्धता नहीं पाई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण भी मांग की गई थी। विभाग ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए कॉलेजों के जवाबों की समीक्षा की, लेकिन संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर कार्रवाई का फैसला लिया गया।
अब नहीं होंगे नामांकन और परीक्षा संबंधी कार्य
आदेश के अनुसार एलओसी रद्द होने के बाद संबंधित संस्थान डिप्लोमा इन फार्मेसी परीक्षा समिति से जुड़े किसी भी प्रकार के नए नामांकन, पंजीयन, परीक्षा अथवा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन नहीं कर सकेंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आदेश के बाद यदि कोई संस्थान नामांकन या अन्य शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित कॉलेज प्रबंधन की होगी।
अभी और बढ़ सकती है कार्रवाई
सूत्रों की मानें तो जांच रिपोर्ट में कई अन्य संस्थानों के खिलाफ भी गंभीर टिप्पणियां दर्ज की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की समीक्षा कर रहा है और आने वाले दिनों में और कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों को गुणवत्तापूर्ण फार्मेसी शिक्षा उपलब्ध कराना है। जो संस्थान निर्धारित मानकों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
राज्य में फार्मेसी शिक्षा पर बड़ा असर
एक साथ 34 कॉलेजों का लेटर ऑफ कंसेंट रद्द होना झारखंड में फार्मेसी शिक्षा क्षेत्र की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। इससे न केवल संस्थानों में जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में नए कॉलेजों के लिए भी स्पष्ट संदेश जाएगा कि सिर्फ कागजी दावों के आधार पर शिक्षा संस्थान नहीं चलाए जा सकते।
विभाग के निर्देश पर हुई बड़ी कार्रवाई
विभाग के निर्देश पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है, पूर्व में विभाग द्वारा कमेटी बनाकर राज्य भर के फार्मेसी कॉलेजों की जांच कराई गई थी। जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। फार्मेसी के छात्रों के भविष्य व फार्मेसी शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए आगे भी सतत प्रयास किया जाएगा। – डॉ. रणधीर कुमार गुप्ता, अध्यक्ष, डिप्लोमा इन फार्मेसी परीक्षा समिति।


