लोहरदगा में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: स्लाइन लगी गर्भवती को स्कूटी पर ले जाने का वीडियो वायरल

Rupa Kumari | June 16, 2026 | 10:44 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, लोहरदगा : जिले के सदर अस्पताल से रेफर की गई एक गंभीर गर्भवती महिला को स्लाइन लगी अवस्था में स्कूटी पर ले जाने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली, मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, कैरो प्रखंड के तोड़ांग गांव निवासी गर्भवती महिला को सोमवार दोपहर लोहरदगा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि महिला की प्रसव तिथि बीते 17 दिन पहले निकल चुकी थी, जबकि प्रसव नहीं हुआ था। साथ ही उसकी स्वास्थ्य स्थिति भी चिंताजनक बताई गई। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए शाम करीब पांच बजे रांची स्थित रिम्स रेफर कर दिया। अस्पताल प्रबंधन की ओर से परिजनों को 108 एंबुलेंस सेवा का उपयोग करने की सलाह भी दी गई थी।

स्कूटी पर बैठाकर अस्पताल से बाहर ले जाई गई महिला

रेफर किए जाने के कुछ समय बाद अस्पताल परिसर से जो तस्वीर सामने आई, उसने सभी को हैरान कर दिया। गंभीर अवस्था में मौजूद गर्भवती महिला को स्लाइन लगी हालत में स्कूटी पर बैठाकर अस्पताल से बाहर ले जाया गया। बताया जा रहा है कि दोपहिया वाहन पर तीन लोग सवार थे। चर्चा यह भी है कि महिला को ले जाने वाला व्यक्ति उसका करीबी परिजन नहीं था। गंभीर मरीज को इस तरह स्कूटी पर ले जाने को लेकर लोगों ने चिंता जताई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि महिला को रिम्स ले जाने के बजाय किसी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसा हुआ है, तो सवाल उठ रहे हैं कि गंभीर स्थिति में रेफर मरीज को सरकारी एंबुलेंस के बजाय स्कूटी से निजी अस्पताल क्यों ले जाया गया और इस पूरी प्रक्रिया में किसकी भूमिका रही।

अस्पताल की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर से एक गंभीर मरीज को स्लाइन लगी अवस्था में दोपहिया वाहन पर ले जाया गया, लेकिन सुरक्षा कर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने इसे रोकने या इसकी जानकारी लेने की कोशिश क्यों नहीं की। मामले में कथित बिचौलियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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जांच के आदेश, दोषियों पर होगी कार्रवाई

लोहरदगा के सिविल सर्जन डॉ. राजू कच्छप ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि किसी भी गंभीर मरीज को इस तरह स्कूटी पर ले जाना उसकी जान को जोखिम में डालने जैसा है। उन्होंने कहा कि अस्पताल उपाधीक्षक (डीएस) और अस्पताल प्रबंधक से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी गई है। जांच के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जांच के दौरान यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि महिला को अस्पताल से किन परिस्थितियों में बाहर ले जाया गया, उसे कहां भर्ती कराया गया और क्या इस पूरे घटनाक्रम में किसी बिचौलिए या अन्य व्यक्ति की भूमिका थी। इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की सुरक्षा और रेफरल व्यवस्था की निगरानी को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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