Samachar Post रिपोर्टर, रांची: रांची के धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन एनेक्सी सभागार में पंचायती राज विभाग की ओर से PESA नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में विभिन्न जिलों के उप विकास आयुक्त, BDO, CO समेत कई अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह ने कहा कि 25 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद झारखंड में PESA कानून लागू हुआ है और अब इसे गांव-गांव तक प्रभावी तरीके से पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।
अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर यह कानून लागू किया गया है, ताकि पारंपरिक ग्राम सभाओं को उनके अधिकार मिल सकें। उन्होंने अधिकारियों से PESA नियमावली का गंभीरता से अध्ययन कर उसे जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू करने को कहा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कानून को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है, जबकि नियमावली में अधिकांश सवालों के स्पष्ट जवाब मौजूद हैं। दीपिका पांडेय सिंह ने निर्देश दिया कि तीन महीने के भीतर पारंपरिक व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधानों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम प्रधान का चयन पारंपरिक ग्राम सभा के माध्यम से ही होना चाहिए।
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क्षेत्रीय भाषाओं में कराया गया अनुवाद
कार्यशाला को संबोधित करते हुए पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने कहा कि PESA नियमावली को स्थानीय स्तर तक पहुंचाने के लिए इसका क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद कराया गया है। उन्होंने बताया कि राज्यभर में 125 मास्टर ट्रेनरों को तैयार किया गया है, जो लोगों को जागरूक करने और नियमावली की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।