- 1952 का खपरैल स्कूल बना खतरा, छत गिरने का डर; नए भवन में जमीन विवाद बना बाधा
Samachar Post रिपोर्टर, जामताड़ा: झारखंड के जामताड़ा जिले से शिक्षा व्यवस्था की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। प्रखंड के उदलबनी पंचायत स्थित राजकीय कृत मध्य विद्यालय, आसनचूहा में 118 बच्चे जर्जर खपरैल भवन में पढ़ने को मजबूर हैं, जहां हर दिन हादसे का खतरा बना हुआ है।
खपरैल भवन बना खतरा
साल 1952 में बना यह स्कूल भवन अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और छत कभी भी गिर सकती है। बारिश के दौरान कमरों में पानी टपकता है, जिससे पढ़ाई बाधित हो जाती है। बच्चों और शिक्षकों के मुताबिक, कई बार क्लास के दौरान छत से खपरैल गिर चुके हैं, जिससे कुछ बच्चे चोटिल भी हुए हैं। छात्रों में हर समय डर का माहौल बना रहता है।
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जमीन विवाद में अटका नया भवन
प्रभारी प्रधानाध्यापक हरिप्रसाद राम के अनुसार, स्कूल का वर्तमान भवन गोचर जमीन पर बना है, जिसके कारण नए भवन निर्माण में तकनीकी अड़चन आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वे बदलनामा के तहत दूसरी जमीन देने को तैयार हैं। सरकारी अमीन द्वारा जमीन की नापी भी वर्षों पहले हो चुकी है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण मामला अब तक अटका हुआ है।
प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
विद्यालय प्रबंधन समिति और स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस मुद्दे को लेकर कई बार जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को लिखित शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही नए भवन का निर्माण शुरू नहीं किया गया, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।
बच्चों का भविष्य अधर में
ऐसे माहौल में पढ़ाई कर रहे 118 बच्चों का भविष्य और सुरक्षा दोनों खतरे में हैं। अभिभावक और ग्रामीण जल्द से जल्द सुरक्षित भवन निर्माण की मांग कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा और बच्चों को इस खतरे से कब राहत मिलेगी।
Reporter | Samachar Post
मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।