Samachar Post रिपोर्टर, रांची: रांची से जुड़े चर्चित कोल ब्लॉक आवंटन मामले में कांग्रेस नेता सुभोधकांत सहाय के भाई सुधीर कुमार सहाय को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की विशेष CBI अदालत ने उन्हें और अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में पूरी तरह असफल रहा। मामला छत्तीसगढ़ के विजय सेंट्रल कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़ा था।
CBI ने लगाए थे गलत जानकारी देने के आरोप
CBI का आरोप था कि SKS Ispat & Power Ltd और उसके अधिकारियों ने गलत जानकारी देकर कोल ब्लॉक हासिल किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक कंपनी ने निवेश, जमीन, उत्पादन क्षमता और पर्यावरण मंजूरी से जुड़े आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था। हालांकि विशेष CBI अदालत की जज सुनेना शर्मा ने कहा कि पूरा मामला केवल “कयास और अंदाजों” पर आधारित था।
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कोर्ट बोली- साजिश का कोई ठोस प्रमाण नहीं
अदालत ने स्पष्ट कहा कि ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों ने किसी तरह की आपराधिक साजिश रची थी या जानबूझकर गलत जानकारी दी थी। मामले में राजनीतिक विवाद भी हुआ था, क्योंकि आरोप लगाया गया था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभोधकांत सहाय ने कंपनी के समर्थन में सिफारिशी पत्र लिखा था। हालांकि अदालत ने कहा कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि उस पत्र का स्क्रीनिंग कमेटी के फैसले पर कोई प्रभाव पड़ा।
“कोलगेट” मामला 2012 में आया था सामने
कोर्ट ने यह भी कहा कि कंपनी द्वारा प्रस्तुत कई आंकड़े ऑडिटेड बैलेंस शीट और आधिकारिक दस्तावेजों पर आधारित थे। ऐसे में यह साबित नहीं हो सका कि जानबूझकर फर्जी जानकारी दी गई थी। गौरतलब है कि देशभर में चर्चित “कोलगेट” मामला वर्ष 2012 में सामने आया था। इसमें 1993 से 2010 के बीच हुए कोल ब्लॉक आवंटन में अनियमितताओं के आरोप लगे थे। बाद में भारत का उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2014 में 200 से अधिक कोल ब्लॉकों का आवंटन रद्द कर दिया था।
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