Samachar Post डेस्क, पटना: बिहार सरकार ने मॉनसून से पहले ग्रामीण इलाकों में बने करीब 45 हजार पुलों और पुलियों के निरीक्षण का फैसला लिया है। इस पहल का उद्देश्य बाढ़ के दौरान होने वाले नुकसान को कम करना और ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखना है। जानकारी के मुताबिक, ग्रामीण कार्य विभाग ने सभी जिलों के कार्यपालक अभियंताओं को पुल, पुलिया और जल निकासी प्रणालियों का विशेष निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। विभाग चाहता है कि भारी बारिश के दौरान कहीं भी ग्रामीण संपर्क बाधित न हो और समय रहते कमजोर संरचनाओं की पहचान कर आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
बाढ़ के दौरान बढ़ जाता है दबाव
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मॉनसून के दौरान पुलों और सड़कों पर भारी दबाव पड़ता है। कई बार जलस्तर बढ़ने पर पानी सड़क और पुल संरचनाओं के ऊपर से बहने लगता है, जिससे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचता है। ऐसी स्थिति में गांवों का संपर्क टूट जाता है और ग्रामीण परिवहन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो जाती है।
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जल निकासी व्यवस्था पर रहेगा विशेष फोकस
सुनील कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बारिश के मौसम में किसी प्रकार की बाधा से बचने के लिए सभी जरूरी निवारक उपाय किए जाएं। निरीक्षण अभियान के दौरान अभियंताओं को पुलों के गर्डर, स्लैब, खंभे, जोड़ और ड्रेनेज सिस्टम की जांच करने को कहा गया है। साथ ही पानी के बहाव को रोकने वाली गाद, मिट्टी और मलबे को तुरंत हटाने का निर्देश भी दिया गया है।
ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड होगी रिपोर्ट
अधिकारियों का कहना है कि पुलों और पुलियों के आसपास जल निकासी सुचारु रखना बेहद जरूरी है, ताकि भारी बारिश के दौरान संरचनाओं पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। राज्यभर से निरीक्षण रिपोर्ट अगले महीने तक विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। इससे सरकार को मॉनसून के तेज होने से पहले ग्रामीण बुनियादी ढांचे की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी।
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