Samachar Post रिपोर्टर, रांची: झारखंड में बोर्ड परीक्षाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।अब झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जेएसी) समेत अन्य बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने के लिए छात्रों के पास पीएएन (परमानेंट एजुकेशन नंबर) और 12 अंकों की APAAR आईडी होना अनिवार्य किया गया है।
2027 से पूरी तरह लागू होगी व्यवस्था
नई व्यवस्था वर्ष 2027 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं से लागू होगी। केवल उन्हीं विद्यार्थियों का नाम सूची (एलओसी) में शामिल किया जाएगा, जिनकी डिजिटल पहचान पूरी होगी। तकनीकी दिक्कतों और आधार से जुड़ी त्रुटियों के कारण इसे पहले लागू नहीं किया जा सका था, इसलिए एक वर्ष का अतिरिक्त समय दिया गया है।
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स्कूलों में तेज हुई तैयारी
स्कूलों ने कक्षा 9वीं से ही छात्रों की डिजिटल प्रोफाइल तैयार करने और पंजीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसका उद्देश्य है कि परीक्षा के समय किसी भी छात्र को दस्तावेज संबंधी परेशानी का सामना न करना पड़े। शिक्षा विभाग के अनुसार, राज्य के कई जिलों में करीब 80 प्रतिशत विद्यार्थियों की पीएएन और APAAR आईडी तैयार हो चुकी है। बाकी छात्रों के लिए यू-डायस पोर्टल के माध्यम से डेटा सुधार और आईडी बनाने का काम जारी है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में भी मिलेगी सहूलियत
अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल पहचान से बोर्ड परीक्षा की प्रक्रिया सरल होगी। साथ ही जेईई मेन, नीट और सीयूईटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन में भी आसानी होगी।
क्या है APAAR ID?
APAAR ID केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल इंडिया पहल के तहत शुरू की गई व्यवस्था है। यह एक डिजिटल पहचान प्रणाली है, जिसमें छात्रों के सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहते हैं और जरूरत पड़ने पर आसानी से उपयोग किए जा सकते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद झारखंड में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और व्यवस्थित बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
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मैंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली है। पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर मेरा अनुभव फिलहाल एक साल से कम है। सामाचार पोस्ट मीडिया के साथ जुड़कर स्टाफ रिपोर्टर के रूप में काम कर रही हूं।