Samachar Post रिपोर्टर,रांची :पश्चिम बंगाल के झारग्राम में 19 अप्रैल 2026 को एक छोटी-सी घटना ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। प्रधानमंत्री पीएम मोदी की चुनावी सभा के बाद उनका काफिला अचानक सड़क किनारे एक झालमुड़ी स्टॉल पर रुका। यह ‘स्नैक ब्रेक’ सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और मोदी के सादगी भरे अंदाज की खूब चर्चा हुई।
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सुरक्षा प्रोटोकॉल बना विवाद की वजह
इस दौरान लागू किए गए कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल अब विवाद के केंद्र में हैं। आरोप है कि सुरक्षा कारणों से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन के हेलीकॉप्टर को झारग्राम में लैंडिंग की अनुमति नहीं मिली। नतीजतन, उन्हें दांतन और केशियाड़ी में अपनी निर्धारित जनसभाएं रद्द करनी पड़ीं और वापस रांची लौटना पड़ा।
टीएमसी का भाजपा पर हमला
टीएमसी ने इस पूरे घटनाक्रम को बड़ा चुनावी मुद्दा बना दिया है। पार्टी का आरोप है कि प्रधानमंत्री के ‘फोटो-ऑप’ और स्नैक ब्रेक को प्राथमिकता दी गई, जिससे अन्य नेताओं के लोकतांत्रिक कार्यक्रम प्रभावित हुए। टीएमसी ने इसे “आदिवासी-विरोधी मानसिकता” तक करार दिया है।
भाजपा की चुप्पी और सुरक्षा एजेंसियों का पक्ष
हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि उच्च सुरक्षा वाले व्यक्ति की मौजूदगी में इलाके में सख्त प्रतिबंध लगाना अनिवार्य होता है।
चुनावी राजनीति में ‘छोटी घटना’ का बड़ा असर
झारग्राम और आसपास के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में यह विवाद चुनावी माहौल को और गर्म कर रहा है। टीएमसी इसे अपने पक्ष में इस्तेमाल कर आदिवासी वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश में है, वहीं भाजपा पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यह घटना दिखाती है कि 2026 के चुनावी माहौल में अब हर छोटी घटना भी बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकती है।
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