रांची में HEC की करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा, खाली प्लॉट्स की धड़ल्ले से खरीद-फरोख्त

Rupa Kumari | March 17, 2026 | 10:43 AM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड की राजधानी रांची में स्थित हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (HEC) की करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला तेजी से बढ़ता जा रहा है। HEC के आवासीय परिसर में खाली पड़े प्लॉट्स पर कब्जाधारियों ने धड़ल्ले से निर्माण शुरू कर दिया है, जबकि प्रबंधन इसे रोकने में असहाय नजर आ रहा है।

नगर निगम की कार्रवाई, फिर भी जारी अतिक्रमण

रांची नगर निगम ने इस पर कार्रवाई शुरू करते हुए पुराना विधानसभा के सामने मुख्य सड़क और बाईपास के किनारे बने कई अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया है। हालांकि इसके बावजूद शहर के अलग-अलग इलाकों में अवैध निर्माण का सिलसिला जारी है।

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आर्थिक तंगी और सुरक्षा की कमी बनी वजह

HEC प्रबंधन के पास पर्याप्त संसाधनों की कमी बताई जा रही है। यहां तक कि निगरानी के लिए गाड़ियों में ईंधन की भी समस्या है, जिससे नियमित निरीक्षण प्रभावित हो रहा है। इसी का फायदा उठाकर कब्जाधारी करोड़ों की जमीन पर निर्माण कर रहे हैं।

नोटिस और चेतावनी जारी

HEC ने नगर प्रशासन विभाग के माध्यम से सभी निवासियों को नोटिस जारी किया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि बिना अनुमति किए गए निर्माण सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत अपराध है। चेतावनी दी गई है कि किसी भी समय अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जा सकता है।

इन इलाकों में तेजी से बढ़ रहा कब्जा

जानकारी के अनुसार HEC आवासीय परिसर के कई हिस्सों में तेजी से अवैध कब्जा बढ़ रहा है, जिनमें प्रमुख रूप से बिरसा चौक, सेक्टर-2 और सेक्टर-3, पंचमुखी मंदिर क्षेत्र, धुर्वा बस स्टैंड, जेपी मार्केट, डैम साइड, आश्रम मैदान और पटेल मैदान इन इलाकों में रोजाना नए निर्माण और जमीन की खरीद-फरोख्त खुलेआम हो रही है।

रोकथाम के प्रयास नाकाफी

स्थिति को काबू में लाने के लिए HEC ने करीब 50 अस्थायी कर्मचारियों को तैनात किया है और छह टीमें बनाई हैं, जिन्हें अवैध निर्माण की पहचान कर रिपोर्ट करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बावजूद कई जगहों पर निर्माण जारी है। खासकर जेपी मार्केट के पास स्थित आश्रम मैदान में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हो रहे हैं, जहां शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इस पूरे मामले ने HEC प्रबंधन की कार्यप्रणाली और शहर में बढ़ते अतिक्रमण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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