जांच के बाद ही होगा धुर्वा के मकानों का आवंटन: सुदिव्य कुमार

Rupa Kumari | March 14, 2026 | 11:42 AM IST
  • निजी संस्थान की लाभुक सूची पर उठे सवाल, बाहरी लोगों को शामिल करने का आरोप

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : रांची के धुर्वा अंतर्गत जगरनाथ मौजा में बने मकानों के आवंटन का मामला शुक्रवार को विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए उठा। इस दौरान सरकार ने साफ किया कि निजी परामर्श संस्थान द्वारा तैयार लाभुक सूची की जांच के बाद ही आवासों का आवंटन किया जाएगा। इस मुद्दे को हटिया विधायक नवीन जायसवाल ने उठाते हुए जगरनाथ मौजा में बने 400 मकानों के जल्द आवंटन की मांग की। जवाब में मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि इनमें से 393 मकान बनकर तैयार हैं, लेकिन आवंटन से पहले लाभुकों की सूची की जांच जरूरी है।

निजी सर्वेक्षण पर सरकार ने उठाए सवाल

मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि वर्ष 2016 में पूर्ववर्ती सरकार के समय एक निजी परामर्श संस्थान से विस्थापित लाभुकों की सूची का सर्वेक्षण कराया गया था। उन्होंने कहा कि यह संभवतः पहला मामला है, जब इस तरह के संवेदनशील विषय में निजी संस्थान से सर्वे कराया गया। मंत्री ने आरोप लगाया कि इस सर्वेक्षण में 108 ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए हैं, जो वास्तविक लाभुक नहीं बल्कि बाहरी लोग हैं। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार किसी भी हाल में बाहरी लोगों को जमीन या मकान का लाभ नहीं लेने देगी।

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अपने लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए जोड़े गए नाम

सदन में मंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि लाभुक सूची में बाहरी लोगों को जोड़ने का काम अपने लोगों को फायदा पहुंचाने की नीयत से किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरी प्रक्रिया की गंभीरता से समीक्षा कर रही है और वास्तविक विस्थापितों के हितों से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि आवास आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी होगी और केवल पात्र लाभुकों को ही इसका लाभ मिलेगा।

सरप्लस जमीन वापसी पर भी उठा सवाल

बहस के दौरान भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने अधिग्रहीत अतिरिक्त जमीन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून-2013 और हेमंत सोरेन सरकार के घोषणा पत्र में सरप्लस जमीन रैयतों को वापस करने का प्रावधान किया गया है। ऐसे में सरकार यह स्पष्ट करे कि क्या वह रैयतों को अतिरिक्त जमीन लौटाने की इच्छुक है। इस पर मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा हाईकोर्ट के आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि रैयतों से अधिग्रहीत अतिरिक्त जमीन वापस नहीं की जाएगी। ऐसे में सरकार को कानूनी पक्ष को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ना होगा।

समिति बनाकर जांच की मांग

नवीन जायसवाल ने सदन में मांग की कि इस पूरे मामले की समिति बनाकर विस्तृत जांच कराई जाए और वास्तविक विस्थापितों को जल्द बसाया जाए। जवाब में मंत्री सुदिव्य कुमार ने सदन से थोड़ा समय देने की मांग की। उन्होंने आश्वस्त किया कि अगले सत्र से पहले सरकार इस मामले में कोई ठोस निर्णय लेगी। इस तरह धुर्वा के जगरनाथ मौजा में बने मकानों के आवंटन का मामला अब जांच, पात्रता और कानूनी पहलुओं के बीच उलझ गया है, जबकि विस्थापित परिवार अब भी अपने पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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