अस्पताल ने नहीं दी मदद, पिता बेटे का शव पैदल घर ले गया

Rupa Kumari | December 20, 2025 | 12:55 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, चाईबासा: चाईबासा के नोवामुंडी प्रखंड से इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। बड़ा बालजोड़ी गांव निवासी डिंबा चतोंबा ने अपने चार साल के इकलौते बेटे को खो दिया, लेकिन बेटे की मौत के बाद भी उसे अस्पताल से कोई मदद नहीं मिल सकी।

अचानक बिगड़ी तबीयत, मासूम की मौत

शुक्रवार दोपहर डिंबा का चार साल का बेटा अचानक बीमार पड़ गया। इलाज के लिए उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कुछ ही देर में उसकी सांसें थम गईं। बेटे की मौत के बाद अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई।

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शव ले जाने के लिए नहीं मिली एंबुलेंस

बेटे की मौत के बाद डिंबा को उम्मीद थी कि अस्पताल प्रशासन शव को घर तक पहुंचाने में मदद करेगा। लेकिन न तो एंबुलेंस मिली और न ही शव वाहन की कोई व्यवस्था की गई। गरीब पिता के पास न साधन थे और न ही पैसे।

प्लास्टिक की थैली में बेटे का शव

डिंबा के पास कुल 100 रुपये थे। मजबूरी में उसने 20 रुपये देकर एक प्लास्टिक की थैली खरीदी और उसी में अपने बेटे का शव रखा। बचे हुए पैसों से वह चाईबासा से नोवामुंडी तक बस से गया।

पैदल गांव तक पहुंचा पिता

नोवामुंडी पहुंचने के बाद डिंबा थैले में बेटे का शव लेकर पैदल अपने गांव बड़ा बालजोड़ी पहुंचा। बेटे का शव कंधे पर और दिल में असहनीय दर्द लिए पिता की यह तस्वीर स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता पर सवाल खड़े करती है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

यह घटना सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर कमियों का आईना है। सवाल यह है कि आखिर गरीब और मजबूर लोगों को ऐसी अमानवीय स्थिति का सामना क्यों करना पड़ता है।

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