लैंड फॉर जॉब केस में आज बड़ा फैसला; लालू परिवार की बढ़ सकती है मुश्किलें

Rupa Kumari | December 4, 2025 | 10:54 AM IST

Samachar Post डेस्क, पटना : लैंड फॉर जॉब (जमीन के बदले नौकरी) मामले में आज का दिन राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। रायसीना रोड स्थित विशेष CBI कोर्ट में गुरुवार को इस हाई-प्रोफाइल केस में आरोप तय किए जाने पर फैसला सुनाया जाएगा। राजनीतिक हलकों से लेकर देशभर की निगाहें आज होने वाली इस सुनवाई पर टिकी हैं।

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क्या है मामला?

यह केस उस अवधि से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव रेलवे मंत्री थे। CBI का आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-D और अन्य पदों पर भर्ती के बदले कई उम्मीदवारों से लालू परिवार के नाम पर जमीन ली गई। एजेंसी का कहना है कि ये जमीनें बाजार मूल्य से काफी कम दामों पर खरीदी गईं और बदले में संबंधित लोगों को रेलवे में नौकरियाँ मिलीं। इस मामले में CBI ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत परिवार के अन्य सदस्यों और कई लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।

आज तय होगा, आगे बढ़ेगा केस या मिलेगी राहत

विशेष CBI जज विशाल गोगने आज यह निर्धारित करेंगे कि आरोप तय करने लायक सबूत मौजूद हैं या नहीं। यदि अदालत को CBI के प्रस्तुत सबूत पर्याप्त मिलते हैं, तो लालू परिवार के लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं सबूत कमज़ोर पाए जाने पर परिवार को बड़ी राहत मिल सकती है। CBI ने कोर्ट में जमीन खरीद संबंधी दस्तावेज, लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण कागजात और कथित लाभार्थियों के बयान पेश किए हैं। एजेंसी का दावा है कि यह मामला स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़ा है। दूसरी ओर लालू परिवार का कहना है कि जमीन की खरीद कानूनी तरीके से की गई थी और इसका रेलवे में भर्ती से कोई संबंध नहीं है। उनका आरोप है कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना के तहत उन्हें निशाना बनाने के लिए उठाया गया है।

बिहार की राजनीति में हलचल तेज

सुनवाई से पहले बिहार की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है। महागठबंधन नेताओं ने इसे विपक्ष को कमजोर करने की साजिश बताया है। वहीं भाजपा का कहना है कि एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। यदि आरोप तय होते हैं, तो लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को एक लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। इससे न केवल उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा, बल्कि आगामी चुनावी रणनीतियों पर भी इसका बड़ा प्रभाव हो सकता है। चारा घोटाले में पहले से दोषी ठहराए जा चुके लालू यादव के लिए यह केस एक और चुनौती बन सकता है, जबकि तेजस्वी यादव के राजनीतिक भविष्य पर भी इसका असर पड़ सकता है।

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