हेमंत सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, सारंडा का 31,468 हेक्टेयर क्षेत्र घोषित होगा सेंक्चुअरी

Rupa Kumari | October 8, 2025 | 05:32 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड सरकार को सारंडा वन क्षेत्र से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को 31,468.25 हेक्टेयर क्षेत्र को सेंक्चुअरी घोषित करने की अनुमति दे दी है। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) और वैध खनन कार्यों को इस सेंक्चुअरी के प्रभाव क्षेत्र से बाहर रखा जाएगा। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनाया। अदालत ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेश की तुलना में अब क्षेत्रफल क्यों बढ़ाया गया है। राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बताया कि वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) ने अपने अध्ययन के बाद केवल 5,519.41 हेक्टेयर क्षेत्र को सेंक्चुअरी घोषित करने की सिफारिश की थी। हालांकि, झारखंड सरकार ने कहा कि यह क्षेत्र पर्यावरणीय और पारिस्थितिक दृष्टि से अपर्याप्त है, इसलिए उसे 31,468.25 हेक्टेयर तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

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राज्य सरकार का पक्ष

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि वह NGT के दिशा-निर्देशों के आधार पर पूरे क्षेत्र को सेंक्चुअरी घोषित करने को तैयार है। साथ ही, यह भी अनुरोध किया गया कि खनन गतिविधियां बाधित न हों, ताकि विकास और पर्यावरण — दोनों के बीच संतुलन बना रहे।

Amicus Curiae का विरोध

Amicus Curiae ने राज्य सरकार के नए चिह्नांकन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही 31,468.25 हेक्टेयर में 126 कंपार्टमेंट को चिन्हित कर चुकी है, जहां कोई खनन नहीं होता। इसलिए, “फिर से चिह्नांकन करने का समय देना अनुचित होगा,” उन्होंने कहा।

सेल की अपील

SAIL ने अदालत से आग्रह किया कि सेंक्चुअरी घोषित करने की प्रक्रिया से उनके खनन कार्यों पर रोक न लगे, क्योंकि सेंक्चुअरी के 1 किमी के दायरे में खनन पर प्रतिबंध रहता है। कोर्ट ने स्टील उत्पादन और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए SAIL तथा अन्य वैध खनन कार्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।

मुख्य सचिव को राहत

अदालत ने झारखंड के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट प्रदान की। वे बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मौजूद थे। यह फैसला झारखंड सरकार के लिए पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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