पूर्व आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल बने आइएमएफ के कार्यकारी निदेशक

Rupa Kumari | August 29, 2025 | 02:00 PM IST
  • भारत की वैश्विक आर्थिक मंचों पर भूमिका और होगी मजबूत

Samachar Post डेस्क, रांची : नई दिल्ली केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल तीन वर्षों का होगा। इस नियुक्ति को भारत के लिए एक रणनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे वैश्विक आर्थिक मंचों पर देश की भागीदारी और प्रभाव और बढ़ेगा।

उर्जित पटेल का कार्यकाल और योगदान

डॉ. पटेल 2016 में RBI के 24वें गवर्नर बने थे और रघुराम राजन के उत्तराधिकारी रहे। उनके कार्यकाल का सबसे चर्चित फैसला नोटबंदी (नवंबर 2016) रहा। हालांकि उन्होंने दिसंबर 2018 में निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल लगभग दो वर्षों का रहा, जो RBI इतिहास में सबसे छोटे कार्यकालों में गिना जाता है।

महंगाई नियंत्रण की नीति

उर्जित पटेल की सिफारिशों पर ही RBI ने मुद्रास्फीति दर को 4% लक्ष्य के आसपास रखने की नीति अपनाई थी। उनकी रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया था, जो आगे चलकर RBI की मौद्रिक नीति का अहम हिस्सा बना।

पहले भी IMF से जुड़ाव

गवर्नर बनने से पहले वे RBI के डिप्टी गवर्नर रहे और मौद्रिक नीति, आर्थिक अनुसंधान व वित्तीय स्थिरता जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
दिलचस्प बात यह है कि पटेल केन्या में जन्मे हैं और IMF में पहले भी पाँच साल तक कार्यरत रह चुके हैं।

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शिक्षा और अन्य भूमिकाएँ

लंदन विश्वविद्यालय से स्नातक, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से M.Phil ,येल यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में PhD। RBI से इस्तीफा देने के बाद उन्हें राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (NIPFP) का चेयरमैन नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने वित्तीय नीतियों पर काम किया।

भारत के लिए रणनीतिक अहमियत

विशेषज्ञों का मानना है कि उर्जित पटेल की यह नियुक्ति भारत की आर्थिक कूटनीति को और मजबूती देगी। उनकी विशेषज्ञता और वैश्विक अनुभव IMF में भारत की आवाज़ और प्रभाव को और सशक्त बनाएगा।

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