टाटा लीज नवीकरण में विस्थापितों के अधिकारों की अनदेखी न हो: मूलवासी अधिकार मंच

Rupa Kumari | May 30, 2026 | 01:15 PM IST

Samachar Post रिपोर्टर, जमशेदपुर: टाटा लीज नवीकरण और विस्थापित परिवारों के अधिकारों को लेकर झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने प्रशासन के समक्ष अपनी चिंताएं रखी हैं। मंच के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य संयोजक हरमोहन महतो के नेतृत्व में पूर्वी सिंहभूम उपायुक्त से मुलाकात कर विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।

विस्थापित परिवारों के अधिकारों की रक्षा की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में कहा कि जमशेदपुर में टाटा कंपनी की स्थापना के दौरान 18 मौजा के हजारों आदिवासी और मूलवासी परिवार विस्थापित हुए थे। इनमें से कई परिवार आज भी पुनर्वास, रोजगार, विस्थापित प्रमाण पत्र, भूमि वापसी और अन्य अधिकारों की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। मंच का कहना है कि टाटा लीज नवीकरण जैसे महत्वपूर्ण मामलों में विस्थापितों और मूल रैयतों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए तथा उनकी सहमति और अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

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1908 और 1937 के खतियान को आधार बनाने की मांग

ज्ञापन में मंच ने मांग की कि विस्थापितों और मूल रैयतों से जुड़े मामलों में वर्ष 1996 के सर्वे खतियान के बजाय 1908 और 1937 के खतियान को आधार बनाया जाए। प्रतिनिधिमंडल का तर्क है कि पुराने खतियानों में मूल रैयतों तथा आदिवासी-मूलवासी समुदायों के अधिकार स्पष्ट रूप से दर्ज हैं, जिससे वास्तविक दावेदारों की पहचान सुनिश्चित की जा सकती है। मंच ने प्रशासन से खतियान और भूमि संबंधी पूर्व में दिए गए आवेदनों की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की भी मांग की। साथ ही लंबे समय से लंबित मामलों के निष्पादन के लिए विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। मुख्य संयोजक हरमोहन महतो ने कहा कि टाटा लीज नवीकरण केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे हजारों विस्थापित और मूलवासी परिवारों के अधिकार जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित लोगों के हितों और अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उपायुक्त ने दिया जांच का आश्वासन

प्रतिनिधिमंडल की बात सुनने के बाद उपायुक्त ने संबंधित मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इस दौरान मंच से जुड़े कई सामाजिक कार्यकर्ता और आंदोलनकारी भी मौजूद रहे। मूलवासी अधिकार मंच ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन विस्थापित परिवारों की समस्याओं के समाधान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाएगा।

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