Samachar Post रिपोर्टर, रांची : रांची प्रेस क्लब में लेखक सुधीर पाल की चार पुस्तकों का विमोचन किया गया। इन पुस्तकों में पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून, आदिवासी अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों पर समुदायों के हक जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई है। इस अवसर पर लेखक ने कहा कि पुस्तकों के माध्यम से पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून को लेकर फैले भ्रम को दूर करने तथा आदिवासी समाज के अधिकारों को व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझाने का प्रयास किया गया है।
जल, जंगल और जमीन से जुड़े फैसलों में ग्रामसभा की भूमिका अहम
सुधीर पाल ने कहा कि आदिवासी समुदायों की स्वायत्तता, ग्रामसभाओं के अधिकार और जल, जंगल व जमीन से जुड़े फैसलों में उनकी भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार और उनके उपयोग को लेकर जारी संघर्ष का भी उल्लेख किया। लेखक के अनुसार, औपनिवेशिक काल से लेकर आजादी के बाद तक प्राकृतिक संसाधनों पर समुदायों के अधिकार का सवाल महत्वपूर्ण बना रहा है। ऐसे में विकास का ऐसा मॉडल जरूरी है, जिसमें हाशिए पर रहने वाले समुदायों के हितों की रक्षा हो और प्राकृतिक संसाधनों का लाभ आम लोगों तक पहुंचे।

पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून को समझाने की पहल
इन पुस्तकों के जरिए पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून से जुड़े प्रावधानों, आदिवासी अधिकारों और ग्रामसभा की भूमिका पर चर्चा की गई है। इनका उद्देश्य आदिवासी समुदायों के अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े सवालों को व्यापक स्तर पर सामने लाना है। रांची प्रेस क्लब में आयोजित विमोचन कार्यक्रम में आदिवासी अधिकारों, स्थानीय स्वशासन और संसाधनों पर समुदायों की भागीदारी जैसे मुद्दे केंद्र में रहे।




















