Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड के साहिबगंज जिले के तालझारी थाना क्षेत्र स्थित मोतीझरना बाजार में एक एएसआई के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में तालझारी थाने में पदस्थापित एएसआई चिंटू कुमार को बिजली के खंभे से बांधकर पीटते हुए देखा जा सकता है। इस दौरान कुछ लोगों ने उनकी सरकारी वर्दी भी फाड़ दी। मामले में साहिबगंज के एसपी अमित सिंह ने एएसआई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
खंभे से बांधकर एएसआई के साथ मारपीट
जानकारी के अनुसार, घटना मोतीझरना बाजार की है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में कुछ लोग एएसआई चिंटू कुमार को बिजली के खंभे से बांधकर मारपीट करते और उनके साथ गाली-गलौज करते दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान उनकी वर्दी फाड़ने की बात भी सामने आई है। वीडियो में कुछ लोग एएसआई पर शराब के नशे में हंगामा करने का आरोप लगाते हुए भी नजर आ रहे हैं। हालांकि, वीडियो में लगाए गए आरोपों और घटना की पूरी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
थाना प्रभारी ने मौके पर पहुंचकर एएसआई को छुड़ाया
घटना की सूचना मिलने के बाद तालझारी थाना प्रभारी नीतीश पांडेय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझाकर स्थिति शांत कराई और एएसआई को लोगों के चंगुल से छुड़ाकर थाने ले गए। बताया जा रहा है कि इस दौरान ग्रामीणों ने पुलिस को लिखित शिकायत भी सौंपी। ग्रामीणों की शिकायत एएसआई के व्यवहार से संबंधित बताई जा रही है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि और उनकी जांच से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
एसपी ने एएसआई को किया निलंबित
मामले में साहिबगंज के एसपी अमित सिंह ने एएसआई चिंटू कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। राजमहल के एसडीपीओ विमलेश कुमार त्रिपाठी ने भी निलंबन की कार्रवाई की पुष्टि की है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। निलंबन के विस्तृत कारणों और घटना से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में आधिकारिक स्तर पर पूरी जानकारी सामने आनी बाकी है।
पुलिस-जनता के संबंधों पर उठे सवाल
मोतीझरना बाजार की इस घटना ने पुलिसकर्मियों के आचरण और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल खड़े किए हैं। यदि किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ शिकायत है, तो उसकी जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए। वहीं, किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेकर मारपीट करने का अधिकार नहीं है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसमें शामिल लोगों की क्या भूमिका रही।

















