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मौत के साये में 36 सप्ताह की हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, प्लेसेंटा पर्क्रेटा केस में मां, नवजात और गर्भाशय तीनों सुरक्षित

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Samachar Post रिपोर्टर, रांची : राजधानी रांची में एक बेहद जटिल और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी का सफल प्रबंधन करते हुए डॉक्टरों ने 36 सप्ताह पर सुरक्षित प्रसव कराया। यह मामला Central Placenta Previa with Placenta Percreta with Bladder Invasion का था, जिसमें प्लेसेंटा गर्भाशय की पूरी दीवार को पार करते हुए मूत्राशय तक पहुंच गया था। सफल सर्जरी के बाद मां, नवजात और गर्भाशय तीनों को सुरक्षित बचा लिया गया।

13वें सप्ताह में हुई गंभीर जटिलता की पहचान

डॉक्टरों के अनुसार, गर्भावस्था के करीब 13वें सप्ताह में ही मरीज की स्थिति का पता चल गया था। प्लेसेंटा पर्क्रेटा गर्भावस्था की सबसे गंभीर जटिलताओं में से एक मानी जाती है, जिसमें प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और आसपास के अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। परिवार ने इस दौरान कई वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों से परामर्श लिया। जटिलता को देखते हुए गर्भावस्था समाप्त करने और भविष्य में हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय निकालने) की संभावना तक बताई गई थी।

लगातार 36 सप्ताह तक हुई विशेषज्ञ निगरानी

डॉ. अपेक्षा साहू की निगरानी में मरीज की गर्भावस्था को सावधानीपूर्वक आगे बढ़ाया गया। पूरे गर्भकाल के दौरान मां और शिशु की स्थिति का नियमित मूल्यांकन किया गया तथा संभावित जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए प्रसव की विस्तृत रणनीति तैयार की गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के मामलों में गर्भाशय खोलने, शिशु को निकालने और प्लेसेंटा के प्रबंधन के दौरान गंभीर रक्तस्राव और मूत्राशय की चोट का जोखिम बेहद अधिक होता है।

चुनौतीपूर्ण सर्जरी के बाद सुरक्षित हुआ प्रसव

36 सप्ताह पूरे होने पर पूर्व नियोजित रणनीति के तहत अत्यंत सावधानी और सटीक सर्जिकल तकनीक के साथ सीज़ेरियन डिलीवरी की गई। कठिन ऑपरेशन के बावजूद स्वस्थ शिशु का जन्म हुआ और मां पूरी तरह सुरक्षित रहीं। सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि इस जटिल स्थिति में गर्भाशय को भी सुरक्षित रखा गया।

विशेषज्ञों के लिए बना महत्वपूर्ण उदाहरण

चिकित्सकों का कहना है कि यह केस समय पर सही पहचान, लगातार विशेषज्ञ निगरानी, बहु-विषयक (Multidisciplinary) तैयारी और सूक्ष्म सर्जिकल योजना का उत्कृष्ट उदाहरण है। जहां शुरुआती चरण में गर्भावस्था समाप्त करने की संभावना जताई गई थी, वहीं 36 सप्ताह तक सुरक्षित गर्भावस्था बनाए रखना और मां, नवजात व गर्भाशय तीनों को बचाना इस उपचार की सबसे बड़ी सफलता रही।

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Meenu

Reporter  |  Samachar Post

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