Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ अभियान पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन का रास्ता बैलेट यानी मतपत्र से होकर गुजरता है, बंदूक या अराजकता से नहीं। दास ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने के विपक्ष के अधिकार को स्वीकार करते हुए कहा कि आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण देना और संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से समाधान खोजना भी जरूरी है।
‘रिजिम चेंज’ के दावे पर विपक्ष को घेरा
रघुवर दास ने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ अभियान और उसके समर्थन में सक्रिय संगठनों पर टिप्पणी करते हुए ‘रिजिम चेंज’ की कोशिशों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केवल नारों और आरोपों के सहारे जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। उनके मुताबिक, भारत का इतिहास बताता है कि सरकारों का फैसला जनता मतदान के जरिए करती है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासन का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी सत्ता का अंत भी चुनाव के माध्यम से हुआ था।
कांग्रेस और वामपंथियों पर लगाए आरोप
दास ने आरोप लगाया कि शिक्षा सुधार के नाम पर शुरू हुआ आंदोलन बाद में कांग्रेस और वामपंथी दलों से जुड़ गया। उन्होंने आंदोलन के एजेंडे, फंडिंग और सोशल मीडिया पर अचानक बढ़े फॉलोअर्स को लेकर सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने इसके पीछे विदेशी शक्तियों की साजिश होने का दावा किया। इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई विस्तृत प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
नक्सलवाद और हिंसा का किया जिक्र
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद और उग्रवादी हिंसा ने देश के कई क्षेत्रों में विकास और शांति के सामने चुनौतियां खड़ी की हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति का उल्लेख करते हुए दावा किया कि नक्सलवाद कमजोर हुआ है। दास ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाली हिंसक प्रवृत्तियों का विरोध जरूरी है।
‘वोट चोर’ के नारे पर भी साधा निशाना
रघुवर दास ने ‘वोट चोर’ के नारे की तुलना कांग्रेस के पुराने ‘चौकीदार चोर है’ नारे से करते हुए कहा कि यह नारा भी समय के साथ दम तोड़ देगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और सरकार की नीतियों का समर्थन किया। दास ने एसआईआर का जिक्र करते हुए इसे देश की संप्रभुता मजबूत करने वाला कदम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना, मतदाता सूची को निष्पक्ष बनाना और प्रत्येक पात्र मतदाता के मतदान के अधिकार की रक्षा करना आवश्यक है। लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष, दोनों की जवाबदेही जनता के प्रति होती है। उनके अनुसार, देश में सत्ता परिवर्तन का वैध रास्ता संविधान और मतदान है, हिंसा या अराजकता नहीं।

















