- सोटो की विशेष कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा- अंगदान बढ़ाने के लिए अस्पतालों पर जनता का भरोसा और पारदर्शी व्यवस्था जरूरी
Samachar Post रिपोर्टर, रांची : झारखंड में अंगदान एवं अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम को गति देने के लिए अब स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में पहल तेज की जा रही है। इसी कड़ी में स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (सोटो) झारखंड की ओर से गुरुवार को विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें ब्रेन-स्टेम डेथ की पहचान और प्रमाणन से लेकर संभावित अंगदाताओं की पहचान, परिजनों से संवाद, अंगों के संरक्षण और प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यशाला में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के विशेषज्ञों के साथ स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में नोटो के निदेशक डॉ. अनिल कुमार, रोटो ईस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. देबांशु सरकार, आईपीजीएमईआर के आईसीयू चीफ डॉ. रजत चौधरी, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ प्रदीप भट्टाचार्य, रिम्स के निदेशक डॉ. डीके सिन्हा, निदेशक प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ सन्याल और एनएचएम के अभियान निदेशक शशि शेखर झा मौजूद रहे।
ब्रेन-स्टेम डेथ की पहचान से लेकर अंग प्रत्यारोपण तक पूरी प्रक्रिया पर चर्चा
विशेषज्ञों ने स्वास्थ्यकर्मियों को ब्रेन-स्टेम डेथ की पहचान और उसके प्रमाणन की प्रक्रिया से अवगत कराया। इसके अलावा अस्पतालों में संभावित अंगदाताओं की पहचान, मृतक के परिजनों से संवेदनशील तरीके से संवाद करने, अंगों के संरक्षण और उनके आवंटन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी मंथन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि अंगदान केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि कई गंभीर मरीजों को नया जीवन देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके लिए राज्य में प्रशिक्षित मानव संसाधन, अस्पतालों में आवश्यक सुविधाएं और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

पैनल चर्चा में उठा ‘अस्पतालों पर विश्वास’ का मुद्दा
डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया कि कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण पैनल डिस्कशन रहा। इसमें झारखंड में अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से शुरू करने और आगे बढ़ाने में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि अंगदान कार्यक्रम की सफलता के लिए आम जनता का अस्पतालों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास सबसे महत्वपूर्ण आधार है। परिवारों को यह भरोसा होना चाहिए कि अंगदान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, नैतिक और वैज्ञानिक मानकों के अनुसार की जाती है। उन्होंने कहा कि जब तक लोगों के मन में प्रक्रिया को लेकर भरोसा नहीं बनेगा, तब तक व्यापक स्तर पर अंगदान को बढ़ावा देना मुश्किल होगा। इसलिए जागरूकता के साथ पारदर्शिता और बेहतर संवाद पर भी विशेष ध्यान देना होगा।

मजबूत समन्वय से बनेगा ऑर्गन डोनेशन इकोसिस्टम
विशेषज्ञों ने अस्पतालों, चिकित्सकों, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटरों, स्वास्थ्य विभाग, सोटो, रोटो और नोटो के बीच मजबूत समन्वय की जरूरत बताई। उनका कहना था कि केवल जागरूकता अभियान चलाने से अंगदान को जनआंदोलन नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए राज्य में एक मजबूत, विश्वसनीय और जवाबदेह अंगदान एवं प्रत्यारोपण व्यवस्था विकसित करनी होगी। कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने सामूहिक प्रयासों के जरिए झारखंड में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम को मजबूत करने पर जोर दिया।

Reporter | Samachar Post



