Samachar Post रिपोर्टर, पटना : सीबीआई ने पटना आयकर विभाग के एक्सेम्प्शन कार्यालय में पदस्थापित महिला आयकर अधिकारी सुनंदा कुमार को कथित तौर पर रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। सीबीआई के अनुसार, एक एनजीओ के टैक्स छूट से जुड़े प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए दस्तावेजों में गलतियां सुधारने के नाम पर रिश्वत की मांग की गई थी। मामले में अधिकारी के एक अधीनस्थ कर्मचारी को भी गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई की कार्रवाई के मुताबिक, अधिकारी को 10 सितंबर को पहली किस्त के तौर पर रिश्वत लेते पकड़ा गया। अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने एनजीओ से जुड़े प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए रकम की मांग की थी।
NGO को टैक्स छूट के प्रमाण पत्र के लिए मांगी रिश्वत
आयकर कानून के तहत पात्र स्वयंसेवी संस्थाओं और ट्रस्ट को टैक्स छूट का लाभ दिया जाता है। इससे जुड़े प्रमाण पत्र आयकर आयुक्त (Exemption) कार्यालय से जारी किए जाते हैं। प्रमाण पत्र मिलने के बाद संस्था को मिलने वाले दान, चंदे और अनुदान पर निर्धारित प्रावधानों के तहत आयकर छूट मिल सकती है। बताया गया है कि सहरसा की ज्योति विवेकानंद संस्थान नामक एनजीओ ने टैक्स छूट के लिए आवेदन और जरूरी दस्तावेज जमा किए थे। एनजीओ की अधिकृत प्रतिनिधि ज्योति मिश्रा प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए विभाग के संपर्क में थीं।
75 हजार रुपये की मांग का आरोप
सीबीआई के अनुसार, दस्तावेजों में गलतियां सुधारने और 12A व 80G से संबंधित प्रमाण पत्र जारी कराने के नाम पर सुनंदा कुमार ने कथित तौर पर अपने लिए 75 हजार रुपये और अधीनस्थ कर्मचारी के लिए 10 हजार रुपये मांगे थे। इसके बाद ज्योति मिश्रा ने मामले की शिकायत सीबीआई से की। जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने का दावा किया गया।
पहली किस्त लेते ही CBI ने की गिरफ्तारी
सीबीआई के मुताबिक, बातचीत के बाद अधिकारी कथित तौर पर अपने लिए 40 हजार रुपये और अधीनस्थ कर्मचारी के लिए 5 हजार रुपये लेने पर सहमत हुईं। पहली किस्त के रूप में अधिकारी के लिए 15 हजार रुपये और कर्मचारी के लिए 2,500 रुपये देने की बात तय हुई। इसके बाद सीबीआई ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए 10 सितंबर को सुनंदा कुमार और उनके अधीनस्थ कर्मचारी को कथित तौर पर रिश्वत की रकम लेते गिरफ्तार कर लिया। मामले में आगे की जांच की जा रही है।
रिश्वत लेने और मांगने से जुड़े आरोप जांच एजेंसी के आरोप हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।





















